जीतना मुश्किल नहीं – Inspirational story

जीतना मुश्किल नहीं

 

आज कॉलेज में दाखिले का आखिरी दिन था और मुकेश को स्पोर्ट्स कोटा (Sports Quota) से एडमिशन मिलने के लिए २०० मीटर दौड़ जीतनी थी।

 

अकेला खड़ा अपने को बहुत हो छोटा महसूस कर रहा था। असल में उसकी एक टांग में किसी खराबी के कारण वो थोड़ा लंगड़ा कर चलता था।

 

इसी हीन भावना को मन में दबाए वह जब दौड़ की लाइन में खड़ा हुआ तो उसे अपने सपने टूटते हुए लगे। पास खड़े लड़कों ने उसे कहा कि क्यों अपना टाइम खराब करते हो ” तुम जीत तो सकते नहीं।”

 

और फिर दौड़ शुरु हो गयी। सब लड़के पूरा जोर लगा के दौड़ रहे थे, उनके माँ बाप, भाई बहन, दोस्त यार सब के सब चीख चीख कर अपने उम्मीदवारों को शाबाशी दे रहे थे।

 

लेकिन यह क्या, दौड़ ख़तम हुई और लंगड़ा कर चलने वाला छात्र, मुकेश, विजेता घोषित किया गया। मुकेश दौड़ जीत गया था। 

 

सब हैरान थे कि यह सब कैसे हुआ। 

 

सब लोग अपने अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए शोर मचा रहे थे पर मुकेश को लगा वह सब उसे उत्साहित (Cheer) कर रहे हैं। 

क्योंकि, मुकेश बचपन से ही बहरा था।

 

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