होली का हुड़दंग – Festival of India

होली का हुड़दंग

 
होली रंगों का त्यौहार है जिसे हिंदु बहुत हर्ष-उल्हास से मनाते हैं। छोटे बड़े सब बढ़ चढ़ कर इस उत्सव की खुशियाँ बाँटते हुए एक दूसरे पर रंगों की बौछार कर देते हैं। अब तो बहुत से दूसरे धर्म के लोग भी इस त्यौहार में संमिलित हो कर रंग और प्यार बाँटते हैं। 
 

 
 
लाल, हरे, पीले, नीले रंगों से सराबोर हो सब नाचते गाते हैं। बच्चे हाथों में रंगों वाली पिचकारी लिए एक दूसरे पर रंग फेकने की होड़ में लग जाते हैं। बड़े बूढ़े एक दूसरे के माथे और मुँह को गुलाल से रंग कर गले मिलते हैं और होली की बधाईयाँ देते दिखते हैं। कभी कभी बच्चे अपनी पिचकारी से बड़ों पर रंग फ़ेंक खिलखिलाते हुए भाग जाते है लेकिन इस शेतानी पर सब हँस देते हैं। कोई ढोल बजाता है तो कोई अपने सुरीले स्वर में गाना सुना सबको मोहित कर लेता है तो कोई अपनी नाचने की कला दिखा सबको उसके साथ नाचने को ललचाता हैं।
 
 
 

कहीं कोई ठंडाई का शरबत बना रहा होता है तो कहीं कोई होली की सबसे पसंद गुजिया बाँटता है। यही तो है होली का मजा जिसमें रंगों के अलावा सब एक दूसरे के साथ भाई चारे में डूब जाते हैं। कहते है होली के त्यौहार में तो दुश्मन भी दोस्त बन जाता है और सब मिल कर होली खेलते हैं। 
 
 
 

दोपहर होने तक सब तरह तरह के रंगों में इतने रंग चुके होते हैं कि चेहरे पहचान पाना नामुमकिन सा हो जाता है। बड़े तो फिर भी अपने अपने घर चल पड़ते हैं लेकिन बच्चों को “बस थोड़ी देर और” खेलना होता है। और बच्चों की होली तब तक चलती रहती है जब तक वह थक कर खुद ही घर की राह न पकड़ लें। फिर सबके जाने के बाद, एक दम से सड़कों, मौहल्लों में सन्नाटा सा छा जाता। रह जाता है, इधर उधर बिखरा हुआ लाल पीला रंग जो सबको याद दिलाता है खुशिओं के वो पल जो सबने साथ मिल कर बिताए थे। 

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