Hindi Story-चालाक बनो-Hindi Kahani

चालाक बनो 
गाँव के सारे लोग उससे परेशान थे। उसका नाम था जगदीश, जो एक बदमाश किसम का व्यक्ति था। क्योंकि, सब उससे डरते थे सो कोई भी उसके सामने बोलने की हिम्मत नहीं करता था। 
 
 
जब भी गाँव में पंचायत या कोई और सभा होती तो सरपँच की कुर्सी पर जा बैठता और अपनी मूछों पर ताव देता रहता। मजबूरन सरपँच को खड़े हो कर ही बोलना पड़ता था। 
 
 
सब सोचते रहते कि कैसे इस जगदीश को सबक सिखाया जाए। बहुत सी योजना भी बनाई मगर सवाल ये होता कि पहल कौन करेगा। 
 
 
एक किसान के बेटा, जिसका नाम राधे था, अपने ननिहाल में रह कर पढ़ाई करता था। लेकिन इन दिनों स्कूल में गर्मी की छुट्टिओं थी और वो अपने माता पिता से मिलने आया हुआ था। 
 
 
जब सारी समस्या उसके कानों में पड़ी तो उसने मन ही मन एक योजना बनाई। वो सरपंच के पास गया और कहा कि वो दो दिन बाद शाम के समय एक पंचायत बुलायें। मगर याद रहे थोड़ा अँधेरा होने वाला हो। और उसने सारी योजना सरपंच को बता दी। योजना सुनते ही सरपंच ने तुरंत ही हाँ कर दी। 
 
 
दो दिन बाद जब थोड़ा अँधेरा होने वाला था तो पंचायत बैठने लगी। गाँव के सब आदमी, औरतें, बच्चे, बूढ़े जमीन पर बिछाई दरियों पर बैठ गए। सबकी नज़र बेसब्री से सरपंच के आने का इंतज़ार कर रही थी। 
 
 
और हमेशा की तरह, सरपंच के आने से पहले जगदीश बदमाश आया और अपनों मूछों पर ताव देता हुआ सरपंच की कुर्सी पर बैठ गया। सारे गाँव वाले आपस में कानाफूसी करने लगे मगर उसे उठने को बोलता कौन। 
 
 
अभी कुछ मिनट ही बीते होंगे कि गाँव वाले क्या देखते हैं, जगदीश कुर्सी पर बैठा तो था लेकिन कभी अपनी बाजू, कभी पीठ, कभी टांग, कभी पेट पर ज़ोर ज़ोर से खुजली कर रहा था। 
 
 
उसका अपने को इस तरह खुजलाना एक भद्दा सा नाच लग रहा था। और सारे गाँव वाले ये सब देख हँसते हँसते लोट पोट हो रहे थे। 
 
 
जब जगदीश से खुजली सेहन नहीं हुई तो उसने अपना कुर्ता उतार फेंका। कुछ देर बाद तो उसे खुजली से बचने के लिए अपनी धोती तक उतारनी पड़ी। आधा नंगा सा खड़ा वो अपनी खुजली मिटा रहा था और सब हंस रहे थे। 
 
 
अपनी हालत देख और सबको अपना मज़ाक बनाते देख उसे बहुत शर्म आयी और वो वहां से भाग गया। और फिर दुबारा वो कभी ना किसी पंचायत में आया और ना कभी कुर्सी पर बैठा। 
 
 
जानते हैं कि राधे की योजना क्या थी ?
 
 
शाम को थोड़ा अँधेरा हो जाता है। अँधेरे का फाएदा उठा राधे ने कुर्सी पर बहुत सी चीटियाँ छोड़ दी थी। और उन चीटियों ने मिल कर जगदीश को काटना शुरू किया और काटती ही चली गयी जब तक वो वहां से भाग नहीं गया। 
 
 
अपनी चालाकी से कैसे राधे ने गाँव वालो की समस्या हल कर दी। 
 
 
इसीलिए कहते हैं कि आगे बढ़ना है तो चालाक बनो। 

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