Hindi Stories for Kids – शरारत करो, नुक्सान नहीं

 

शिवानी एक बहुत ही शरारती लड़की थी। घर हो या स्कूल, सबको परेशान करना उसका रोज़ का काम था। 

 
 

घर में माँ बोलती नहा लो, तो खेलने भाग जाती। माँ कहती खाना खा लो तो हाथ में किताब ले पलंग के नीचे चुप जाती। स्कूल में टीचर कहे कि अपनी कापी में गिनती लिखो, तो कापी में चित्र बनाने लगती। टीचर बोले कि कहानी सुनायो, तो गाना गाने लग जाती। 

 
 
माँ ने और टीचर ने बहुत समझाया पर शिवानी पर कोई भी असर नहीं हुआ। उल्टा उसकी शरारतें रोज़ बढ़ती जा रही थी। 
 
 

एक रात जब शिवानी सो गयी तो किसी ने उसके कमरे की खिड़की पर दस्तक दी। इतनी रात दस्तक सुन शिवानी डर कर उठ गयी। डरते हुए उसने खिड़की खोली तो सामने एक पारी का खड़ा देख उसकी आंखें खुली की खुली रह गयी। इतनी सुन्दर पारी को देख शिवानी उसे निहारे ही जा रही थी मगर कुछ बोल नहीं पायी। तब उस पारी ने अपना हाथ घुमाया और उसके हाथ में एक सुनहरे रंग की जादुई छड़ी आ गयी। उस जादुई छड़ी को शिवानी की तरफ बढ़ाते हुए वो पारी बोली ” मैं तुम से बहुत खुश हूँ बच्ची, इस लिए तुम्हे वरदान देती हूँ कि जब भी तुम इस छड़ी को किसी चीज़ की तरफ मोड़ कर गायब-हो-जा बोलोगी वो गायब हो जाएगी।”

 
 

और उस छड़ी को शिवानी के हाथ में दे वो पारी गायब हो गयी। शिवानी को यकीन ही नहीं हो रहा था। उसने परखने के लिए अपनी टेबल पर पड़े दूध के गिलास की तरफ छड़ी घुमाई और बोली “गायब-हो-जा, तो पल भर में गिलास गायब हो गया। अब तो शिवानी की ख़ुशी का ठिकाना ही ना था।

 
 
उस रात उसे नींद नहीं आयी, क्योंकि रात भर वो सोचती रही कि सुबह उसे किस किस चीज़ को गायब करना है। नयी से नयी शरारत करने का तरीका सोचते हुए जाने कब उसे नींद आ गयी। 
 
 
रोज़ की तरह छोटी सी प्यारी सी चिड़ियों ने शिवानी की खिड़की पर बैठ चहकना शुरू किया तो उसकी नींद टूट गयी। नींद से भरी आंखें खोलते ही शिवानी ने हाथ हिला उन चिड़यों को भगा दिया, उसे अभी और सोना था। लेकिन जैसा रोज़ होता था, चिड़ियाँ फिर आ कर चहकने लगी। दुबारा अपनी नींद टूटते देख गुस्से में भरी शिवानी को एक दम उस जादुई छड़ी की याद आ गयी। तकिये से छड़ी निकाल उसने उसे चिड़यों की तरफ घुमा गायब-हो-जा बोल दिया। और सब चिड़ियाँ गायब हो गयी। चहकना बंद हुआ और शांति हुई, तो शिवानी फिर बिस्तर में घुस सो गयी। 
 
 
कुछ देर बाद माँ ने उसे उठाया और कहा कि जल्दी तैयार हो जाए। स्कूल जो जाना था, स्कूल का नाम सुनते ही शिवानी के फटाफट खड़ी हो गयी और नयी तरकीबें सोचते हुए वो तैयारी में लग गयी। 
 
 
स्कूल पहुँच शिवानी ने जो उधम मचाया उसका का तो कहना ही क्या। कभी किसी का बस्ता गायब तो कभी किसी की पेंसिल, किसी चपरासी की जूती गायब तो किसी की टोपी। टीचर क्लास में अपना बैग ले कर आती तो उसकी टेबल से उसका बैग गायब, सब टीचर मिल बैठ खाना खाने बैठे तो सब के टिफ़िन गायब। हो क्या रहा है आज, कोई समझ नहीं पाया और ना ही पता कर पाया की कौन कर रहा है। बस सब हैरान परेशान दिख रहे थे। यहाँ तक कि कुछ देर बाद एक चपरासी ने आकर बताया कि छुट्टी हो गयी है। घंटी नहीं बजेगी, क्योंकि स्कूल का घंटा भी गायब। सबके मन में डर और चेहरे पर चिंता दिख रही थी, सिवाय शिवानी के। वो तो इन सब से मन ही मन खुश थी और सब का आनंद ले रही थी। 
 
 
रात सोते समय सारे दिन भर की शरारतों को याद कर खुश हो, वो मुस्कराती हुई सो गयी। 
 

 
 

सुबह जब नींद खुली तो कुछ अजीब सा लगा, मानो अभी सुबह ही ना हुई हो। सोच रही थी कि ऐसा उसे क्यों लग रहा है कि तभी कुछ याद कर उसके दिल को एक झटका सा लगा। आज उसकी रोज़ की प्यारी सी चिड़ियों का चहकना नहीं सुनाई पड़ रहा था। कल की बात याद कर उसकी आँखों में आँसू आ गए। यह उसने क्या किया।

 
 

उन प्यारी से छोटी चिड़ियों को गायब कर दिया, वह भी सिर्फ थोड़ा और सोने के लिए। उसका मन उदास तो हुआ ही साथ में अपने प्रति घृणा से भर गया। ये मैंने शरारत के नाम पर कितना बड़ा अपराध कर दिया। उसकी आँखों से पश्चाताप के आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। अपना मुँह तकिये में छुपा वो सुबकने लगी।

 
 
तभी, उसकी खिड़की पर एक दस्तक हुई। उसे लगा मानो सब चिड़याँ वापिस आ गयी हैं। दौड़ कर जब खिड़की खोली तो सामने कल रात वाली परी खड़ी मुस्करा रही थी। शिवानी का रोता हुआ चेहरा देख वो बोल ” अरे, तुम रो क्यों रही हो।” बस फिर क्या था, शिवानी ने रोते रोते दिन भर की गयी शरारतों को बता दिया और आगे से कभी किसी को नुकसान ना पहुंचाने का वादा भी किया। परी से अपनी प्यारी सी चिड़यों को वापिस लाने की प्रार्थना की। 
 
 
परी भी तो यही चाहती थी। उन्होंने उसे वादा किया कि अगर वो उस जादुई छड़ी को उन्हें लौटा दे तो सब चिड़याँ वापिस आ जाएंगी। और शिवानी ने ख़ुशी से उस छड़ी को वापिस कर दिया। और पल भर में सब चिड़याँ उसकी खिड़की पर बैठ चहकाने लगी। शिवानी की ख़ुशी का ठिकाना ना था। वो नाचते कूदते उन सब के साथ खेलने लगी। 
 
 
लगता था कि शिवानी अब समझ गयी थी कि शरारतें किसी को नुकसान के लिए नहीं करनी चाहिए। 


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