मीनू चली भाई ढूंढ़ने – Inspirational Emotions

मीनू चली भाई ढूंढ़ने 
तीन साल की मीनू उदास थी क्योंकि उसके साथ कोई भी खेलने वाला नहीं था। पापा मम्मी ऑफिस चले जाते और उसका भाई स्कूल। जब भी वो भाई को कहती “आओ खेलें” तो वह कोई ना कोई बहाना बना देता। एक दिन जब फिर से भाई को खेलने को कहा तो वो चिढ़ कर बोला  “तुझे खेलना हैं तो जा कोई और भाई ले आ।” ” भाई कहाँ मिलता है” पूछा तो भाई बोला “बाजार में”
 
 
अगले दिन मम्मी पापा ऑफिस चले गए, भाई स्कूल और घर की नौकरानी घर के काम में उलझ गयी। तब मौका देख मीनू निकल पड़ी भाई ढूंढ़ने बाजार की तरफ।
 
पहली बार अकेली बाजार में आयी थी। चरों तरफ लोगों की भीड़ देख वो थोड़ा घबरा गयी और इधर उधर देखने लगी। जैसे भाई बेचने की दूकान ढून्ढ रही हो। 
 
 
एक दूकान में बहुत से बच्चे देख उसका चेहरा खिल उठा। यही है वो दुकान जहाँ भाई मिलता होगा। दौड़ते हुए उस दुकान में चली गयी। अंदर बच्चे दुकानदार से किताबें खरीद रहे थे। कुछ देर तक तो वो कोने में खड़ी सब देखती रही और उसकी तरफ किसी का धयान भी नहीं गया। 
 
 
जब बच्चों की भीड़ कुछ कम हुई तो दुकानदार की नज़र मीनू पर पड़ी। सहमी सी मीनू को देख वो बोलै “अरे, ये बच्ची किसके साथ है” जब किसी ने जवाब नहीं दिया तो वो मीनू के पास आया और प्यार से पुछा “बेटा, आप किसके साथ आयी हो” क्या बताती बस चुप सी खड़ी रही। दुकानदार ने फिर पुछा “क्या कुछ खरीदने आयी हो” यह सुन मीनू ने भोलेपन से कहा “हाँ, एक भाई दो मुझे” पहले तो दुकानदार हँस पड़ा लेकिन समझ गया की बच्ची खो गयी है। 
 
 
उसने उसे गोद में उठाया और अपनी कुर्सी पर बिठा दिया। 
“आपका नाम क्या है बेटा” “मीनू” “
“और तुम्हारे पापा का नाम” “रणजीत चौधरी”
“आप कहाँ रहती हो ” “घर में”
“और आपका घर कहाँ है” “मुझे नहीं पता”
 
 
अब दुकानदार तो परेशान था ही लेकिन मीनू भी घबरा गयी थी। बच्ची को सेहमा देख उसने पास की दूकान से कोका कोला मँगवाई और मीनू को पीने को दी। डरते हुए मीनू ने ले ली और चुप चाप पीने लगी। पीते पीते उसे अपने घर की याद सताने लगी और मम्मी पापा को याद कर रोने लगी। 
 
 
दुकानदार ने उसे समझाया कि भाई दुकानों पर नहीं घर में मिलता है तो वो जिद करने लगी कि मुझे घर जाना है। और घर का उसे पता नहीं। कुछ और लोग भी जमा हो गए और इतने लोगों को देख मीनू जोर से रोने लगी। किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था तभी एक लड़का किताब खरीदने इस दुकान में आया। 
 
 
उसके अंदर आते ही कुर्सी पर बैठी मीनू चिल्ला पड़ी “भइया” जब लड़के ने मुड़ कर देखा तो हैरान रह गया। भाग कर मीनू के पास गया और उसके आँसू पोछते हुए पूछा  “तू यहां कैसे, किसके साथ आयी है” 
 
 
“अपने की तो कहा था की भाई बाजार में मिलता है सो मैं आ गयी लेने” यह सुन भाई को अपनी कही बात याद आ गयी। उसने मीनू को गोद में उठा कास के छाती से लगा लिया और बोला “पगली, मैंने तो मजाक किया था” 
 
 
बड़े भाई की समझ में आ गया कि मीनू अपने को कितना अकेला महसूस करती है। 
 
 
दुकानदार को धन्यवाद कह मीनू को लेकर घर आया और बहुत प्यार से बोला “आज से मैं तेरे साथ रोज़ खेलूंगा” और मीनू खुश हो अपने भाई के गले लग गयी। 

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