चिड़िया और हाथी – Moral story for Kids

चिड़िया और हाथी

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एक थी चिड़िया। बहुत सुंदर और प्यारी सी। जब देखो इधर उधर फुदकती, नाचती रहती। 
जंगल में एक हाथी था। वो जब चिड़िया को नाचते फुदकते देखता तो बहुत खुश हो जाता।  

एक दिन उसने चिड़िया से कहा ” मुझसे दोस्ती करोगी। ” तो चिड़िया बोली ” मैं इतनी छोटी और आप इतने बड़े हो। हम कैसे दोस्त बन सकते हैं। ” 

तब हाथी बोला ” हम एक दूसरे के साथ रह कर खूब मजे कर सकते हैं। मैं तुम्हें अपनी पीठ पर बिठा कर पूरे जंगल में घुमा सकता हूँ। तुम्हें मुसीबत पड़ने पर बचा सकता हूँ। “

चिड़िया मान गई और दोनों दोस्त बन गए। वो रोज मिलते गप्प शप्प लगाते। 

जंगल में एक लोमड़ी भी थी। वो रोज चिड़िया को देखती और सोचती, काश ! मैं इसे पकड़ सकूँ, फिर तो खाने का मजा ही आ जाएगा। 

एक दिन जब चिड़िया मज़े से कूद रही थी तो अचानक से उसके सामने लोमड़ी आ गई। उसने झट से उसे पकड़ लिया। लोमड़ी ने कहा ” चिड़िया रानी, अब तो मैंने तुम्हें पकड़ लिया और मैं तुम्हें खा जाऊँगी। अब तुम्हें कोई भी बचा नहीं पाएगा। ” 

यह सुन कर चिड़िया ने जोर जोर से चिल्लाना शुरु किया। तभी हाथी ने चिड़िया का चिल्लाना सुना और झट से उसे बचाने दौड़ पड़ा। 

हाथी को देखते ही लोमड़ी डर के भाग गयी और उसके हाथ से चिड़िया निकल गयी। 

इस तरह हाथी ने चिड़िया की जान बचाई और उनकी दोस्ती और भी पक्की हो गई। 

बच्चो ! इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है। 

“अच्छा दोस्त वही जो समय पर काम आए।”

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