निबंध – होली पर निबंध – Holi Essay in Hindi

होली पर निबंध (600 शब्द)
 
होली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। लेकिन हिंदुओं के इलावा बहुत से दुसरे धर्म के लोग भी मिल ज़ुल कर ये उत्सव  अति उत्साह से मनाते हैं। होली का पावन उत्सव भारत तथा बहुत से हिंदू आबादी वाले अन्य स्थानों में  मनाया जाता है। यह महत्वपूर्ण त्योहार हमें मित्रता और भाईचारे का सन्देश देता है। यह रंगों का त्यौहार हमें बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रेरणा देता है।
 
 
होली उत्सव के प्रारम्भ होने के पीछे भी एक बहुत हो रोचक कहानी है। यह कहानी है एक अहंकारी राजा हिरण्य कश्यप एवं उनकी बहिन होलिका की और राजा के बेटे प्रहलाद की जो भगवान के प्रति समर्पित था। राजा चाहता था कि सब उसकी भक्ति और पूजा करें लेकिन प्रहलाद भगवन विष्णु के भक्त थे। इसी कारण राजा और होलिका मिल कर प्रहलाद पर अत्याचार करते थे। फिर भी जब वो उसकी भक्ति और भगवन पर विशवास तोड़ नहीं पाए तो उसे मारने के बहुत से उपाय किए। लेकिन जब सब उपाय विफल हुए तो राजा और होलिका ने मिल कर उसे जला कर मारने की योजना बनाई। होलिका को एक चुनरी वरदान में मिली थी जिसको आग जला नहीं सकती थी। प्रहलाद को अपनी गोदी में बैठा वो आग की चिता में बैठ गयी। सौभाग्य से प्रहलाद, जिसे भगवान ने आशीर्वाद दिया था, बच गया और होलिका आग में जल कर भस्म हो गयी।
 
होली से एक दिन पहले लोग होलिका दहन कर अहंकार पर आस्था की जीत की ख़ुशी मनाते है।
 
और फिर शुरू होता है ये रंगों और प्रेम से भरा होली का त्यौहार। बच्चे तो बच्चे, बड़े बूढ़े, नर नारी सब एक दुसरे को रंगों से सराबोर करने में जुट जाते हैं। कोई सूखे रंगों से तो कोई रंग भरी पिचकारी से दुसरे को रंग देता है। कोई लाल रंग से तो कोई पीले से, कोई भगवा रंग से तो कोई नीले रंग से खेलने में मस्त हो जाता है। जहाँ देखो ऐसा लगता है मानो आसमान के इंद्रधनुष के सब रंग धरती पर उतर आएं हो। रंगों के साथ साथ होती है हँसी मजाक की बौछार जो ख़ुशी से लोगों को पागल सा कर देती है।
 
बच्चे एक दुसरे के पीछे भाग रहे हैं ताकि कोई भी उनसे बच ना पाए। कुछ बड़े छुप रहे हैं ताकि उनपर कोई रंग ना डाल दे। कुछ लोग ढोल नगाड़े बजाते हुए नाच रहे हैं तो कुछ अपने मधुर स्वर में होली के गीत गाते हुए दूसरों का मनोरंजन कर रहे हैं। जहाँ देखो वहां सामाजिक भेद भाव भुला सब हँसमुख वातावरण का आनंद उठा रहे हैं। चारों तरफ सिर्फ रंग ही रंग दिख रहा है। लोगों के चेहरे रंगों के पीछे छुप से गए हैं। यहाँ तक कि कल तक की काली सड़क भी आज भाँति भाँति के रंगों में डूबी सी दिख रही है। यह सब नजारा लगभग दोपहर तक चलता रहता है या तब तक जब तक सब थक के चूर ना हो जाएँ।
 
फिर उसी शाम को बनते हैं स्वादिष्ट भोजन और मिठाइयाँ जो सब रिश्तेदार और मित्रगण एक जगह इकठ्ठा हो खाते हैं और दिन भर की उछाल कूद को याद कर उस दिन को और भी अविस्मरणीय बना देते हैं।
 
किंतु कुछ लोग इस दिन मदिरा और दुसरे नशीले पदार्थों का सेवन कर गन्दी हरकतें करते है। कुछ तो रंग लगाने के बहाने गंदे रंग और कीचड़ तक दूसरों पर फेंक अपनी दुश्मनी निकालने लग गए हैं। इन गलत और उलटी सीधी हरकतों के कारण कई महिलाओं और पुरुषों ने इस होली के पावन उत्सव में सम्मिलित होना ही बंद कर दिया है।
 
हमें होली एक सभ्य तरीके से खेलनी चाहिए ताकि ना तो किसी का नुक्सान हो या किसी की भावना को ठेस पहुँचे।

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