सफलता पाने के टिप्स-Goals of Life

हर जीव का कोई न कोई लक्ष्य होता है। पशु-पक्षियों का लक्ष्य तो सिर्फ अपने पेट भरने और अपनी रक्षा करने तक सीमित होता है। लेकिन क्या सिर्फ इतना ही लक्ष्य रखना मनुष्य के लिए संभव है ? 
मनुष्य का जीवन पाना एक वरदान स्वरुप है, लेकिन मनुष्य का जीवन तरह-तरह की रुकावटों और समस्याओं से भरपूर है। शायद, इसीलिए परमात्मा ने हमें ज्यादा बुद्धि प्रदान की है, ताकि उन समस्याओं से हम निपट सकें। 
आप भी सोच रहे होंगे कि जीवन के लक्ष्य का चिंताओं और समस्याओं से क्या सम्बन्ध। याद रहे, बहुत गहरा सम्बंद है। शेर का लक्ष्य भी शिकार करने को तभी होता है जब उसे भूख की चिंता सताती है। 
लेकिन शायद यही फ़र्क़ है हम में और शेर में। 
हर एक इंसान का कोई न कोई लक्ष्य अवश्य होता है। किसी का लक्ष्य बड़ा तो किसी का छोटा। बड़ा-छोटा उसकी मौजूदा हैसियत से नहीं उसकी सोच के कारण होता है। सपने तो सभी देखते है लेकिन उन सपनों को असल जिंदगी में उतरना एक कला है, जिसका नाम है लक्ष्य। 
लक्ष्य हमें अपनी मंजिल तक पहुँचने में बहुत की कारगर साबित होता है। The goal proves to be very effective in reaching our destination.
क्या आप पिकनिक पर जाने से पहले यह नहीं सोचते की कहाँ जाना है। जहाँ जाना है वही आपकी पिकनिक वाले दिन का लक्ष्य है। जब पिकनिक के एक दिन का लक्ष्य बना सकते हैं तो सारे जीवन का लक्ष्य कौन बनाएगा। यह आप पर निर्भर करता है कि जीवन के किस मोड़ या किस आयु में आप लक्ष्य बनाते हैं। जीवन में जितना जल्दी अपना लक्ष्य बना लेंगे उतना ही कम कठनाइयों का सामना करना पड़ेगा। 
पढ़ने-लिखने की उम्र में आपका लक्ष्य अच्छे नम्बरों से पास होने का हो सकता है, लेकिन सिर्फ नंबर ही नहीं बल्कि ज्ञान में वृद्धि आपका लक्ष्य होना चाहिए। क्योंकि अकेले नंबर नहीं बल्कि ज्ञान ही जीवन भर आपका साथ देगा। नंबर तो रट (Cram) कर भी आ सकते हैं मगर जो topic को समझ कर परीक्षा देने में संतुष्टि मिलेगी वह रटने में नहीं। 
इसके बाद आपका लक्ष्य बदल जाता है क्योंकि अब शुरू होती है जिंदगी की असली दौड़-धूप, यानी नौकरी पाना या कोई व्यवसाय (Business) करना। यहाँ आपको बहुत सी बातों को ध्यान में रख कर अपना लक्ष्य बनाना चाहिए क्योंकि नौकरी या बिज़नेस बहुत ही लम्बे समय तक आपके साथ चलेगा। यह जीवन का पड़ाव एक बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ होता है। अक्सर लोग इस मोड़ पर आकर भटक जाते हैं और कोई गलत फैसला ले लेते हैं जो आगे चल कर काफी महंगा और दुखदाई सिद्ध होता है। 
जीवन के इस मोड़ पर अपना लक्ष्य बनाते हुए आप सबसे पहले अपने सपनों को टटोलें। इस आयु तक पहुँचते हुए आप ने बहुत सपने देखे होंगे, मैं यह बनूँगा मैं यह करूंगा। मैं इसलिए आपको सपने सोचने को कह रहा हूँ, क्योंकि उन सपनों के पीछे एक बहुत ही बड़ा आधार होता है, उसे हम ख़ुशी (Happiness) कहते हैं। जवानी में जो सपने देखे जाते हैं वह अक्सर आपके दिल की गहराईओं से निकले होते हैं और दिल के अंदर छुपी होता है आपकी ख़ुशी का भण्डार। 
ऐसे लक्ष्य का क्या फैयदा अगर वह आपको जीवन में ख़ुशी ही न दे सके। खाना जब तक स्वादिष्ट (Tasty) न हो उसे खाने में मजा नहीं आता। इसी तरह नौकरी या बिज़नेस जब तक मन पसंद नहीं होगा तब तक आपका मन कभी भी पूरी तरह से उसमे नहीं लगेगा, और मन का न लगना अवश्य नतीजे बुरे ही लाएगा। इसलिए, जीवन के सबसे बड़े लक्ष्य को बहुत सोच समझ कर बनाना चाहिए। मगर याद रहे, उस लक्ष्य को पाने की लिए समय भी लगेगा और बहुत सी कठिनायों का सामना भी करना पड़ेगा। 
समय इस लिए लगेगा क्योंकि जिस लक्ष्य को आप ले कर चल रहे हैं उसे पाने की लिए उस कार्य का अनुभव (Experience) ही आप को आगे लेजाएगा और उस में समय लगेगा। बस अपने लक्ष्य को ध्यान में रख कर बढ़ते जाए, लक्ष्य दूर नहीं। 
कठिनाई तो हर काम में होती है बस धीरज रख कर उसका सामना करते जाओ। कोई भी नया काम शुरू करो तो आपको आसान लगेगा, लेकिन जैसे-जैसे आप उस काम की बरीकिओं को देखेंगे और समझेंगे आपको झुंझुलाहट होगी कि यह मैंने पहले क्यों नहीं सोचा। मगर, यही समय होगा आपकी असली परीक्षा का, उन कठिन समस्यायों को शांत स्वाभाव से सुलझाने के बाद आप अपने लक्ष्य की दूसरी सीढ़ी पार कर जाएंगे। इसी को कहते हैं अनुभव बटोरना जो जीवन भर आपका साथ देगा। 
दोस्तों, अपनी सफलता की सीढ़ी पर चढ़ने से पहले जीवन का लक्ष्य अवश्य निर्धारित कर लें, यह आपके सुन्दर भविष्य का आधार है। 
सफलता किसी चीज का नाम नहीं जिसे हाथ बढ़ा कर पकड़ लें,
यह एक निरंतर प्रक्रिया है जो विकास और प्रगति की ओर ले जाती है।
Gaining success is a continuous process that
leads to development and progress. 

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