सकारात्मक सोच-Positive Thinking for Success

क्या सफलता पर चंद लोगो का मालिकाना हक़ है? अरे भाई, सफलता तो खुले आसमान और हवा की तरह है। जो चाहे हिम्मत करे, हाथ बढ़ाए और अपने कब्जे में कर ले। बस कुछ लोग अपनी नेगेटिव थिंकिंग (negative thinking) की वजह से हिम्मत नहीं दिखा पाते और जीवन भर उस गोल्डन चांस (golden chance) को गवाने का रोना रोते रहते हैं। 
आप भी क्या अपने सपनों को किन्ही कारणों से टूटते और बिखरते देखना बर्दाश्त कर पाओगे। नहीं ना…… तो फिर नीचे लिखे सफल होने के टिप्स पर ध्यान दो और उन्हें अपनी जीवन शैली में शामिल करो। फिर देखो कैसे आपके सपनों को एक दिशा मिलती है जो सफलता और सिर्फ सफलता के मार्ग पर ले जाती है।  
सकारात्मक सोच – Think Positive 
किसी भी काम को शुरू करने से पहले हर व्यक्ति उसके फायदे और नुक्सान के बारे में सोचता है। यह ज़रूरी भी है, मगर अक्सर होता क्या है, उस काम के फाएदे (positive) को छोड़ नुक्सान (negative) ज्यादा ही ढूंढ़ने लग जाते हैं। अब आप ही सोचो कि किस काम में नुकसान या रिस्क नहीं होता। क्या एक हवाई जहाज़ के क्रैश (crash) के बाद लोग हवाई यात्रा बंद कर देते हैं, या किसी पैदल चल रहे व्यक्ति को कोई वाहन टक्कर मार दे तो पैदल चलना छोड़ नहीं देते, या किसी का डाइवोर्स (divorce) होने की खबर सुन शादी से इनकार नहीं कर देते। तो फिर भाई काम को लेकर फायदे छोड़ नुक्सान के पीछे क्यों लग कर आईडिया (idea) क्यों बदल देते हो। 
निखिल और रवि ने एक ही बाजार में अगल बगल दुकान किराए पर ली और साड़ी बेचने का काम शुरू किया। निखिल ने तो दूकान में एयर कंडीशनर (air conditioner) लगवा लिया लेकिन रवि ने ये सोच की जब दुकान चल पड़ेगी तो लगवा लुँगा। क्योंकि निखिल ने ग्राहक की सुविधा का ख्याल रखा था तो उसकी की दुकान पर तो ग्राहकों की भीड़ लग जाती लेकिन बेचारा रवि खाली ही बैठा रहता। हालाँकि, दोनों एक जैसी ही साड़ियाँ बेचते थे लेकिन एक की पॉजिटिव थिंकिंग ने अपना काम चला लिया और दूसरा मुँह देखता ही रह गया। कुछ दिन बाद हताश हो रवि ने भी एयर कंडीशनर लगवा लिया लेकिन तब तक तो निखिल काफी आगे निकल चुका था।
जब तक गिरोगे नहीं तब तक चोट का दर्द महसूस नहीं कर पाओगे। कुछ रिस्क तो लेना हो पड़ेगा भाई, तभी उस नुक्सान (negative) को फायदे (positive) में बदल पाओगे। 
मेरे बस का नहीं  – I am not capable 
पर कौन बोला कि आप के बस का नहीं। पडोसी बोला, यार दोस्त बोला या किसी रिश्तेदार ने ताना मार दिया। लोगों का क्या है जो मन में आये बोल देते हैं बीना सोचे समझे। कभी अपने अंदर झांक कर नहीं देखते की वो खुद कितने सफल हैं। इसे सिर्फ दुसरे की ईर्षा (jealousy) या अज्ञानता (ignorance) मान कर भुला देना ही हमारे लिए फायदे का सौदा है।
ये जीवन तुम्हारा है और इसे किस ढंग से जीना है उसका फैसला आप खुद लें। कभी भी किसी नेगेटिव फीलिंग अपने मन में ना आने दें, जो ठान लिया हैं उस पर धयान केंद्रित करें और अपनी नज़रें अपनी मंजिल की राह पर गड़ा के चलते जाएँ, सफलता दूर नहीं। 
अब सदी के सर्वोत्तम कलाकार अमिताभ बच्चन जी का उदाहरण ही ले लीजिए। जब वो फ़िल्मी संसार में आये थे तो शुरू में कितना संघर्ष लिया उन्होंने। जब वो प्रोडूसर के पास पहली बार गए थे तो उन्हें यह कह कर चलता किया था कि “तुम बहुत लम्बे हो”। दूसरे किसी प्रोडूसर ने यह कह कर टाल दिया था कि “तुम्हारी आवाज बहुत भारी है”। इन सब के बाद भी वो मैदान में लड़ते रहे और आज कहाँ हैं आप सब जानते ही हैं। 
सोचो की अगर अमिताभ जी ने भी यह सोच की ” मेरे बस का नहीं ” हार मान ली होती तो क्या वो आज की सफलता हासिल कर पाते। नहीं कर पाते, और हम इस सर्वोत्तम कलाकार की कला से वंचित हो जाते। 
अपना लक्ष्य बनाए  – Set your Goals 
किसी भी काम को शुरू करने से पहले एक लक्ष्य साधना ज़रूरी होता है। वो लक्ष्य ही आपको प्रेरित करता रहता है आगे बढ़ने के लिए। फ़ौज में भर्ती होते हुए हर फौजी का लक्ष्य होता है एक दिन जनरल बनने का, लेकिन, बनता तो सिर्फ एक ही है। मगर इसका मतलब ये नहीं कि बाकी फौजी उस लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत करना या सपने देखना छोड़ देते हैं। सब फौजी जनरल नहीं लेकिन कर्नल, ब्रिगेडियर की सुशोभित पोस्ट पर पहुँच जाते है और यही है लक्ष्य साधने का इनाम। 
सिविल सर्विसेज (civil services) के लिए न जाने कितने लोग तैयारी करते हैं। मगर सफलता उनके हाथ ही लगती है जो लगन के साथ एक लक्ष्य ले कर चलते हैं। हर पारीक्षा का लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ उस परीक्षा में सफल होने का होना चाहिए। ऐसा मन में ख़याल नहीं लाएँ कि यहाँ पास नहीं हुआ तो ये कर लूँगा और वो कर लूँगा। अपना मन अपने लक्ष्य पर केंद्रित करें, सफलता आपके कदम चूमेगी। 
विजयपत सिंघाणया साहिब ने एक अरसा पहले एक कपड़ा बनाने की फैक्ट्री लगायी थी। उनका लक्ष्य था अपने ही देश में कपड़ा उत्पादन करना ताकि विदेशों से कपड़ा न खरीदना पड़े। और आज देखें अपने लक्षय को कैसे उन्होंने पा कर देश की सबसे बड़ी कपड़ा कंपनी खड़ी कर दी, जिसे आप रेयमंड (Reymonds) के नाम से जानते हैं। 
अगर आप कोई धंदा करते हैं और उस धंदे के बादशाह कहलाने का लक्ष्य बनाते हैं तो ज़रूर सफल होंगे। आप किसी कंपनी में नौकरी करते हैं तो अपनी लगन और मेहनत के दम पर आप उस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (managing director) के पद को हासिल कर सकते हैं। दिन रात पढ़ने में लगा कर आप डॉक्टर या इंजीनियर बनने का लक्ष्य बनाएँ तो सफलता अवश्य मिलेगी। आप इतना याद रखें कि लक्ष्य कभी बड़ा या छोटा नहीं होता। ऐसा नहीं होना चाहिए कि कार खरीदने के चक्कर में आप लक्ष्य बना लें की मारुती कंपनी को खरीदना है। लक्ष्य हमेशा एवेरेस्ट को चोटी पर पहुँचने का नहीं लेकिन वास्तविकता के आधार पर बनाना ठीक रहता है। क्योंकि एवेरस्ट के इलावा और बहुत से पहाड़ हैं जहाँ आप रॉक क्लाइम्बिंग (rock climbing) कर सकते हैं। 
दोस्तों! यह सिर्फ कुछ टिप्स हैं जो आपके जीवन में सफलता लाने में बहुत ही लाभदायक सिद्ध होंगे। और बहुत सारे टिप्स मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हुँ लेकिन उस से पहले आपकी राय और कमैंट्स का इंतज़ार रहेगा। 
सकारात्मक सोच – Think Positive
अपना लक्ष्य बनाएँ और लगन मेहनत से अपना जीवन सफल बनाएँ। 

यह उन्नति की ओर आगे ले जाने वाला व्यक्तित्व विकास का लेख आपको कैसा लगा?
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