लालची बन्दर – Moral Story in Hindi

एक दिन बंदरों का झुंड खाने की तलाश में घूम रहा था। 
कुछ दूर जाने पर उन्हें एक घर दिखा जिस की खिड़की तो खुली थी लेकिन उस पर लोहे का जंगला लगा था। 
अंदर टेबल पर पड़े बहुत से फल दिख रहे थे। फलों को देख सबके मून में पानी आ गया। 
कुछ बंदरों ने जंगले में से अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन छोटी सी जगह के कारण कोई भी अंदर ना जा सका। 
सब निराश हो चलने लगे तो क्या देखते हैं कि झुंड में सबसे पतला एक बन्दर अंदर पहुँच गया था। 
सबने ख़ुशी से ताली बजाई और अंदर पहुंचे बन्दर से फल बाहर फेंकने को कहा। 
 

लेकिन वो पतला बन्दर फल खाने में इतना मस्त हो गया कि दोस्तों को भूल वो जल्दी से सारे फल खा गया। 
सारे फल खाने के बाद जब वो जंगले से निकलने लगा तो वो उस छोटी जगह से निकल नहीं सका। 
बहुत कोशिश की लेकिन इतने फल खाने के बाद वो मोटा हो गया था। 
अब बाहर खड़े बंदरों ने उसका खूब मजाक उड़ाया और कहा कि जब तक बिना खाने के पतले नहीं हो जाते तब तक इसी कमरे में बंद रहो। 
बाकी सब बन्दर उसे वहीं छोड़ चले गए। पहले पतला अब मोटा बन्दर अपने किए पर पछताने लगा और रोने लगा। 

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