मैना को किसने बचाया-Story for Kids

रात का अँधेरा घना हो चला था। हवा तेज चल रही थी। बादल बिजली और वज्रध्वनि के साथ आने वाली आंधी की चेतावनी दे रहे थे। लगता था जैसे आज जम कर बारिश होगी और खूब ओले पड़ेंगें। 

मैना बहुत घबरा गयी थी। अपने घोसले से वो बहुत दूर निकल चुकी थी। समझ में नहीं नहीं आ रहा था कि रात कहाँ गुजारे। उसे किसी पेड़ पर अकेले रहने से डर लगता था। 
उड़ते हुए तभी उसकी नज़र एक पेड़ पर पड़ी। उस पेड़ पर बहुत से कौवे बैठे आपस में बातें कर रहे थे। इतने सारे कौवों को देख उसकी जान में जान आयी। सोचा रात यहाँ ही बिता लेती हूँ। फिर क्या था उड़ते हुए वो उस पेड़ पर जा बैठी। बैठते ही उसने कौवों से कहा ” भाईयों, क्या में आज रात आप सब के साथ रह सकती हूँ। ” इतना सुनते ही कौवों के सरदार ने जवाब दिए ” नहीं, ये हमारा पेड़ है। इस पर हमारे सिवाय कोई और नहीं रह सकता। तुम भागो यहाँ से। “
इस तरह का बर्ताव देख मैना बोली ” भाइयों, मैं अकेली किसी कोने में पड़ी रहूँगी और किसी को भी तंग नहीं करूंगी। आप ही सोचो मैं अकेली जान इतनी आँधी भरी रात कहाँ जाऊँगी। “
लेकिन मैना के अनुरोध करने का कोई भी असर उन कौवों पर नहीं पड़ा। ” तुम यहाँ से भाग जाओ नहीं तो हम तुम्हे मार देंगे। ” इतना कह सब मैना की तरफ बढ़ने लगे। बेचारी मैना दर गयी और वहाँ से उड़ने लगी। जाते जाते उसने उन सब कौवों को कहा ” भगवान तुम्हारी रक्षा करे। ” ये सुन सब कौवे हसने लगे और बोले ” जाकर अपने भगवान से बोल वो तेरी रक्षा करें। “
निराश हो मैना वहां से चल दी और पास ही के दुसरे पेड़ पर बैठ गयी। तभी बदल गरजने लगे और ज़ोर से बारिश और आँधी शुरू हो गयी। मैना बुरी तरह से भीड़ गयी और घबरा कर दूसरी डाल पर जा बैठी। उस डाल पर बैठते ही वो टूट गयी। उस खोकली डाल के टूटते ही पेड़ में एक बड़ा सा गड्ढा बन गया। बस फिर क्या था, मैना झट से उस बड़े से गड्ढे में जा छुपी। 

कुछ देर बाद बहुत तेज बारिश के साथ मोटे मोटे ओले भी गिरने लगे। तभी उसके कान में कौवों के रोने चिल्लाने की आवाज सुनाई पड़ी। ओले की मार से बहुत से कौवे घायल हो जमीन पर गिर गए, कुछ कौवों की तो मौत भी हो गयी। लेकिन पेड़ के गड्ढे ने मैना की रक्षा की। 
सुबह सवेरा हुआ तो बारिश रुक चुकी थी और आस्मां साफ़ हो गया था। 
मैना पेड़ के गड्ढे से निकली तो देखा बहुत से कौवे घायल अवस्था में जमीन पर पड़े कराह रहे थे। उनके पास जा मैना बोली ” देखो, भगवान ने मुझे बचा लिया। तुम भी भगवान पर भरोसा रखते तो तुम्हारी ये दुर्दशा ना होती। ” इतना कह मैना अपने घोसले की तरफ उड़ गयी। 
दुःख दर्द के समय भगवान् तो हमारी रक्षा करतें ही हैं, लेकिन बुरे समय में हम सबको एक दूसरे का साथ देना चाहिए। यह सोच दूसरों की मदत करो कि हो सकता है कल तुम्हे भी किसी मदत की जरुरत पड़ सकती है। 

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