मूर्ख को सलाह देना बेकार है – Moral Story for Kids

मूर्ख को सलाह देना बेकार है

घने जंगल में एक फलों के पेड़ पर बहुत सी चिड़यों ने अपना घोसला बनाया हुआ था। सब चिड़या और उनके बच्चे उन्ही घोसलों में रहते थे। 

 
 
सुबह शाम सब उन फलों को खाते और रात आराम से अपने अपने घोसले में जा सो जाते। सुबह होते ही फिर चिड़यों का चहकना शुरू हो जाता। और सारा दिन ना जाने आपस में क्या क्या बात करते रहते थे। 
 
 
हालाँकि, जंगल में बहुत से जंगली जानवर रहते थे, पर चिड़यों को उनसे कोई खतरा नहीं था। क्योंकि, उनका घोसला तो फलों के पेड़ की उचाई पर बना था। 
 
दिन में बहुत से शाकाहारी जानवर उस पेड़ पर अक्सर आते और नीचे गिरे फलों को खाकर अपनी भूख मिटाते। फल खाने के बाद सब पास में बहते एक झरने से पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते। 
 
 
सब जानवर खा पीकर वहाँ से जल्दी से निकल जाते क्योंकि, उस जंगल में एक बहुत ही खतरनाक शेर भी रहता था। 
 
 
शेर दिन भर की गर्मी से बचने के लिए सारा दिन सोता रहता था। लेकिन, जब मौसम थोड़ा ठंडा हो जाता तो शाम से ही वो उस फलों के पेड़ के चक्कर लगाने शुरू कर देता। 
 
 
चिडयों को तो पता था कि शेर वहाँ फल खाने नहीं बल्कि फल खाने आए जानवरों को मार कर खाने आता है।  
 
 
एक दिन शाम को एक बन्दर आया और नीचे पड़े फलों को ना खाकर वो पेड़ पर चढ़ गया और चारों तरफ अपने मन पसंद फलों को देख उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। फल तोड़ता और थोड़ा खा उसे नीचे फ़ेंक देता। फिर दूसरा तोड़ता और उसे भी थोड़ा सा खाने के बाद नीचे फ़ेंक देता। बड़े ही आराम से फल खाता रहा और बीच बीच में सुस्ता भी लेता। 
 
 
बन्दर तो फलों के रास में ऐसा डूब गया कि उसे पता ही नहीं चला की कब शाम हो गयी। कुछ देर बाद उसने सोचा कि पास वाले झरने से पाने पी लेता हूँ और फिर आकर कुछ और फल खाता हूँ। पानी पीने के लिए जब वो पेड़ से नीचे उतरने लगा तो पेड़ पर बैठी एक चिड़या ने कहा 
 
 
” बन्दर भाई, नीचे मत जाओ, इस समय तो शेर के आने का समय हो गया है।” 
 
 
बन्दर को ये बात पसंद नहीं आयी कि एक छोटी सी चिड़या उसे कोई सलाह दे। वो गुस्से से बोला 
 
 
” तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे रोकने की। तू छोटे दिमाग वाली चिड़या अपनी सलाह अपने पास रख।”
 
 
चिड़या ने फिर उसे कहा ” भाई, शेर बहुत ही खतरनाक है। तुम्हे पकड़ लिया तो मार कर खा जाएगा। आप सुबह होने का इंतज़ार कर लो, फिर पेड़ से उतर जाना।” 
 
 
लेकिन बन्दर कहाँ उस छोटी सी चिड़या की सलाह को मानने वाला था। वो गुर्राता हुआ पेड़ से उतरा और झरने की तरफ चल दिया। पानी पीया और मजे से टहलते हुए वापिस पेड़ की तरफ चल दिया। 
 
 
पेड़ के पास पहुँचा ही था कि शिकार की तलाश में बैठे शेर ने उस पर हमला कर दिया और मार कर खा गया। 
 
 
देखा कैसे किसी की बात ना मान कर कैसे बन्दर ने अपनी जान गवा दी। 
 
 
तभी कहती है कि मूर्ख को सलाह देना बेकार है। 

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