मिठाई चोर 

घर में मेहमान आने वाले थे। सुधा सुबह से ही तैयारी में जुटी थी। कभी किचन में खाना बनाती तो कभी घर की साफ़-सफाई में लग जाती। 

उनके पति दिनेश बाजार से खूब सारी मिठाई ले आये थे। मिठाईओं को कमरे में संभाल कर रखने के बाद उन्होंने अपने दोनों बच्चों, राखी और चिंटू, को कहा ” देखो, यह मिठाइयां मैं मेहमानों के लिए लाया हूँ। जब तक मेहमान खा-पीकर चले न जाएं, तब तक तुम दोनों इन मिठाईओं को छूना भी नहीं। ” और दोनों ने हाँ कर दी। 

मेहमान आये, बैठे, जी भर कर बातें की, भोजन किया और हाथ मुँह धोने को खड़े होने ही वाले थे तो दिनेश को मिठाइयां याद आ गयी। उन्हें उठने से रोकते हुए वह कमरे की तरफ मिठाइयां लाने को लपके।

लेकिन यह क्या, आधे से ज़्यादा मिठाइयां तो गायब थी। जलेबी के थाल में सिर्फ 2-3 जलेबियाँ ही बची थी। रसगुल्लों के बर्तन में रसगुल्लों से ज्यादा उनका रस ही दिख रहा था। बर्फी की प्लेट की तरफ देखा तो ऐसे लगा जैसे बर्फी के 1-2  टुकड़े दिनेश को चिड़ा रहे हो। 

दुःख तो हुआ लेकिन अब क्या कर सकता था। मिठाई की जगह पान-सुपारी लाकर मेहमानों के सामने रख दी। मेहमानों को पता भी न चला की उनको खिलाने वाली मिठाइयां कोई और चट कर गया था। 
मेहमानों के चले जाने के बाद, सुधा ने जब दिनेश से पुछा कि मिठाइयां क्यों नहीं खिलाई तो दिनेश ने सारी बात पत्नी को बता दी। दोनों समझ गए कि मिठाइयां किसी और ने नहीं बल्कि उनके ही बच्चों ने खायी हैं। राखी और चिंटू को बुलाया गया और दिनेश ने पूछा ” मेरे मना करने के बाद भी तुम दोनों ने मठाइयाँ क्यों खायी। “
दोनों बच्चे एक साथ एक ही सुर में बोल पड़े ” मैंने कोई मिठाई नहीं खायी। ” दोनों में से कोई मानने को तैयार ही नहीं था। अजीब तमाशा है, दोनों ने मिठाई नहीं खायी तो कौन खा गया। लेकिन सुधा और दिनेश को यकीन था कि दोनों या एक झूट बोल रहा है। और उस झूट बोलने वाले को सबक तो सिखाना चाहिए। 
कुछ सोचने के बाद सुधा ने दिनेश से कहा ” चलो छोड़ो, मेहमान तो खुश होकर ही गए हैं। अब जितनी भी मिठाई बची है उसे हम मिल बाँट कर खा लेते हैं। जाओ बच्चो मिठाइयां उठा कर यहाँ ले आओ। ” चिंटू और राखी सारी मिठाइयां ले आए और मेज पर रख दी। 
सुधा ने बची हुई मिठाइयों को चार बराबर भागों में बांटा और एक-एक भाग सब को दे दिया। सब खाने लग गए। राखी तो मानो मिठाइयां देख उन पर टूट पड़ी थी। लेकिन चिंटू बहुत ही बेमन से छोटे से टुकड़े को खाने लगा। सुधा बहुत ही ध्यान से यह सब देख रही थी। 
तब सुधा ने सबके सामने कहा ” मिठाई चोर तो पकड़ा गया है, और मुझे पता है कि कौन है। अच्छा होगा कि वह खुद ही आगे आकर यह मान ले। ” न तो चिंटू कुछ बोला और न ही राखी ने कुछ कहा। 

तब सुधा ने सख्त आवाज में कहा ” मिठाइयां चिंटू ने खायी हैं। ” 

यह सुन दिनेश ने सुधा से पुछा कि उसने चिंटू को पकड़ा कैसे। तब सुधा ने बताया 

” मैंने जब सबको मिठाइएं दी तो राखी तो तुरंत उन्हें मजे में खाने लग गयी, लेकिन चिंटू उन्हें हाथ तक लगाने में हिचकिचा रहा था। तभी मैं समझ गयी कि उसका मन मिठाई खाने में क्यों नहीं था। क्योंकि पहले से इतनी मिठाइयां जो खा चुका था। “
” हाँ माँ, मुझे माफ़ कर दो, मैंने ही खायी हैं। ”  सब हैरानी से चिंटू की तरफ देखने लगे। दिनेश और सुधा ने उसे खूब समझाया और आगे से ऐसा न करने का वादा लेकर ही छोड़ा।  
माता-पिता जब मना करते हैं तो उसके पीछे अवश्य ही कोई कारण होता है। 
अगर किसी कारण वश कोई गलती हो जाए तो परिणाम की चिंता किए बिना अपनी गलती को स्वीकारना आपके अच्छे चरित्र को दर्शाता है। 
 

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