माँ का प्यार

बीमार माँ को चाय का प्याला थमा बेटा दवा लेने बाजार चला गया। जब दवा लेकर आया तो माँ ने कहाँ ” बेटा, चाय तो ठंडी हो गयी।”
बेटे ने चाय गरम कर के माँ को दी और दवा खाने को कहा। माँ ने जैसे ही चाय का घूँट लिया तो उसमे चीनी थी ही नहीं। ” बेटा, चाय में चीनी डालना तो तुम भूल ही गए। “
बेटे ने चीनी डाल कर फिर से माँ को चाय दी। माँ जैसे ही दवा की गोली मुँह में रखने लगी तो गोली हाथ से छूट गयी। नीचे देखा तो दिखी ही नहीं। शायद पलंग के नीचे चली गयी थी। 
बेटे को फिर आवाज लगायी ” बेटा, गोली गिर गयी, जरा पलंग के नीचे से निकाल देना।”

झुँझलाता हुआ बेटा आया ” क्या माँ, कभी चाय ठंडी हो गयी, कभी चीनी नहीं, कभी दवा गिर गयी। मुझे क्या और कोई काम नहीं है क्या।” इतना कह उसने दवा की गोली उठा माँ के हाथ में दी। 
दवा लेते हुए माँ ने उसका हाथ पकड़ अपने पास बैठा लिया और प्यार से बोली ” जब तू बीमार होता था तो कभी तुझे जूस चाहिए होता था तो कभी सूप। कभी खिचड़ी तो कभी दाल रोटी। कभी टीवी लगा दो, तो कभी मेरा गिटार दे दो। क्या मैंने कभी तुझे कहा कि मुझे भी और काम करने हैं। ” 
बेटा चुप चाप आंखें नीचे किए सब सुनता रहा। जब चेहरा उप्पर उठाया तो आँखों में आँसू थे ” सॉरी माँ, न जाने मैं क्यों ऐसा बोल गया जिससे आपको दुःख हुआ। मुझे माफ़ कर दो।”
और माँ ने उसे सीने से लगा लिया। 
बड़े बुजुर्गों से हमें प्यार और आदर से बात करनी चाहिए। उनके बूढ़े होने का मतलब ये ना लें कि वह आप पर बोझ हैं। क्योंकि जब आप छोटे थे तो आप उन पर आश्रित थे। माता पिता की सेवा निस्वार्थ करनी चाहिए, ताकि उनका आशीर्वाद आपको सदा प्राप्त होता रहे। 

Also Read:


Your comments encourage us

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

  1. काफी वेबसाइट पर इस तरह की कहानी के लिए विजिट किया| इस कहानी को पढ़ का आँखे भर आई| में भी अपनी वेबसाइट पर एसी ही एक मार्मिक कहानी लिखने का मन बना रहा था लेकिन उस से पहले आपकी इस साईट पर मुझे काफी शानदार कहानी पढने को मिल गई|

    इस पोस्ट के लिए बहुत बहुत धन्यवाद|

    • आपकी उत्साहजनक टिप्पणियाँ ही हमारा प्रेरणास्रोत हैं। धन्यवाद!