बीरबल की चतुराई

 

रामलाल के खेत में ना तो कोई कुआँ था और बारिश ना होने की वजह से सूखा पड़ा हुआ था। चारों तरफ हरियाली की लहर दिखती थी। मगर रामलाल के खेत में सूखे की मार झेलती तबाही ही दिखती थी।

उसके खेत से सटा खेत एक सूदखोर और लालची व्यक्ति भीम सिंह का था। उस खेत में दो कुँए थे जिन की वजह से उसके खेत में फसल खूब होती थी।

रामलाल ने सोचा कि अगर मैं भीम सिंह से एक कुआँ खरीद लूँ तो मेरी फसल को भी भरपूर पानी मिल पायेगा। यह विचार आते ही उसने भीम सिंह से सौदा कर एक कुआँ खरीद लिया।

अगले दिन रामलाल ख़ुशी ख़ुशी खेत पर पहुंचा और अपने खरीदे हुए कुँए से पानी लेने लगा। तभी भीम सिंह वहाँ आ टपका और उसे पानी लेने से रोक दिया। जब कारण पुछा तो बोला
” तुमने कुआँ खरीदा है लेकिन उसमे पानी तो मेरा है। पानी चाहिए तो उसके पैसे अलग से देने होंगे।”

यह सुन बेचारा रामलाल दुखी हो घर लौट आया। उसे उम्मीद नहीं थी की भीम सिंह लालच की वजह से इतना नीचे गिर जाएगा। घर पहुँच उसने अपनी पत्नी को सारा किस्सा सुनाया तो वो भी हक्की बक्की रह गयी। आखिर दोनों ने फैसला किया कि इसका हल तो सिर्फ सम्राट अकबर के दरबार में ही मिलेगा।

सम्राट अकबर के दरबार में पहुँच रामलाल ने अपनी आप बीती सुनाई और सम्राट से इन्साफ की गुहार लगायी। सम्राट ने बीरबल को बुलाया और इस अजीब से मुक़दमे को सुलझाने को कहा। बीरबल ने सारी बात सुन सिपाहीओं को भेज भीम सिंह को दरबार में बुला लिया।

बरिबल ने जब भीम सिंह से झगड़े का कारण पुछा तो उसने वही बात दोहरा दी।
” जनाब, इसने कुआँ खरीदा है पानी नहीं।”

बस फिर क्या था। बीरबल का दिमाग फ़ौरन हरकत में आया और उसने बहुत ही चतुराई से भीम सिंह की कही बात में से ही झगड़े का हल निकल लिया।
” भीम सिंह, माना की रामलाल ने सिर्फ कुआँ ही खरीदा है और उसका पानी नहीं। तो इसका मतलब हुआ की पानी तुम्हारा है।” यह बात सुन भीम सिंह ने खुश हो हाँ में सर हिला दिया।
तब चतुर बीरबल ने अपना फैसला सुनाया

 

” क्योंकि कुआँ रामलाल का है इसलिय भीम सिंह को उसमे अपना पानी रखने का कोई हक़ नहीं है। भीम सिंह तुम फ़ौरन अपना सारा पानी उस कुँए से निकल लो।”

इतना सुनते ही भीम सिंह का सर चकराने लगा। उसकी चालाकी उस पर ही भारी पड़ने लगी। हाथ जोड़ते हुए वो बीरबल के पैर पर गिर माफ़ी माँगने लगा। बीरबल ने उसे रामलाल से माफ़ी मांगने को कहा और दोबारा ऐसी चालाकी दिखाने पर जेल जाने की चितावनी दे छोड़ दिया। अपनी गलती का एहसास कर भीम सिंह ने रामलाल से माफ़ी मांगी।

इस तरह कुआँ और उसक पानी उसके असली मालिक रामलाल को मिल गया।

देखो, कैसे चतुर बीरबल ने एक लालची इंसान की चालाकी को मूर्खता साबित कर फैसला सचाई के हक़ में दिया।

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