बिल्ली और इंसान – Story of Compassion

एक गांव जंगल के किनारे बसा था। अक्सर गांव वाले जंगल में टहलने को निकल जाया करते थे। 
एक दिन एक बुजुर्ग जब जंगल में टहल रहा था तो उसे एक बिल्ली के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। आवाज की तरफ जब वह पहुंचा तो उसने देखा कि एक बिल्ली पेड़ में बने एक बिल में फँस गयी थी। अपने को बाहर निकलने की बिल्ली काफी कोशिश कर रही थी। मगर हर बार विफल हो जाती। 
उसे इस तरह बिल में फंसा देख उस बुजुर्ग को उस पर तरस आ गया। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया ताकि बिल्ली की मदत कर सके। लेकिन बिल्ली ने डर कर उसके हाथ पर पंजा मार दिया। उस बुजुर्ग के हाथ पर काफी खरोंच लगी। लेकिन उसने फिर से अपना हाथ आगे बढ़ाया ताकि किसी तरह वह बिल्ली को बाहर निकल सके। लेकिन बिल में फँसी बिल्ली बहुत ही घबराई और डरी हुई थी। डर कर बिल्ली ने फिर उस बुजुर्ग के हाथ पर पंजा मार दिया। दो तीन बार ऐसा हुआ, बूजुर्ग हाथ बढ़ाता और बिल्ली पंजा मार देती। 
एक दूसरा आदमी पास ही खड़ा यह सब हैरानी से देख रहा था। उसने उस बुजुर्ग से कहा कि तुम इसे इसके हाल पर छोड़ दो, नहीं तो ये तुम्हे इसी तरह पंजा मारती रहेगी। 
लेकिन उस बुजुर्ग ने आदमी की बातों को अनसुना कर फिर कोशिश की। किसी तरह उसने उस बिल्ली को बाहर निकल दिया। बिल्ली की तो मानो जान में जान आयी। बिल से बाहर निकलते ही वो भाग जंगल में गायब हो गयी। 
बिल्ली को छुड़ा वह बुजुर्ग उस आदमी के पास गया और बोला 
” बिल्ली का तो स्वभाव ही पंजा मारना है। लेकिन इंसान के स्वभाव में दया और सहानुभूति होती है।” ” उस बिल्ली ने अपना स्वभाव दिखाया और मैंने अपना।”
किसी के साथ अपनी प्रकृति के अनुसार व्यवहार करो, ना की उसकी प्रकृति के अनुसार। हमें दूसरों के प्रीति दया और सदभावना से भरा बर्ताव करना चाहिए। 

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