बहकावे से बचो – Moral Story for Kids

एक किसान अपने घर की तरफ जा रहा था। अभी कुछ ही दूर गया तो उसे रास्ते में एक सुन्दर सी पगड़ी पड़ी दिखी। लाल रंग की पगड़ी और उस की बनावट तो मानो उस पगड़ी को चार चाँद लगा रही हो। आस पास किसी को ना देख उसने उस पगड़ी को अपने सिर पर रखा और सीना तान कर शान से घर चल दिया। उसने सोचा, इस पगड़ी को देख सब जल भुन जाएँगे।
 
 
अभी कुछ ही दूर गया था कि तीन बदमाशों की नज़र उसकी पगड़ी पर गयी। उन्होंने ने सोचा इस गरीब किसान के पास इतनी सुन्दर और महंगी पगड़ी कहाँ से आ गयी। उनमे से एक किसान के पास गया और पुछा की ऐसी सुन्दर पगड़ी उसे कहाँ से मिली। किसान ने जवाब में बता दिया कि ये रास्ते में पड़ी हुई मिली है मुझे। 
 
 
बस फिर क्या था, तीनों बदमाशों ने उस पगड़ी को हथियाने की एक योजना बनाई। 
 
 
किसान अभी कुछ दूर ही गया था कि एक बदमाश पास आकर बोला ” चाचा, ये कोतवाल साहब की पगड़ी तुम्हारे पास कैसे। कहीं चोरी तो नहीं कर ली।” ये सुन किसान ने घबरा कर उत्तर दिया ” नहीं भाई, ये तो मुझे रास्ते में पड़ी मिली है।”
 
 
कुछ और दूर गया तो दूसरा बदमाश पास आकर बोला ” अरे चाचा, तुम तो बहुत ही बहादुर हो, कोटाल साहब की पगड़ी पर ही हाथ साफ़ कर दिया।” अब क्या था, किसान बेचारा डर गया और चलते चलते उसने पगड़ी उतार हाथ में पकड़ ली। 

 
 
घर के पास पहुँचने ही वाला था की तीसरा बदमाश दौड़ता हुआ आया और किसान से बोला ” चाचा भागो, कोतवाल साहब के सिपाही इधर ही आ रहे हैं।” डर कर किसान ने उस पगड़ी को वही फेंका और वहां से भाग गया। 
 
 
बदमाशों ने उस पगड़ी को उठाया और किसान का मजाक उड़ाते हुए वहाँ से निकल पड़े। 
 
 
इसी लिए कहते हैं कि, किसी के कहने या बहकावे में नहीं आना चाहिए। 

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