पत्नी और बेटी में फ़र्क़-Personality Development

हर छोटी-बड़ी घटना जीवन के किसी न किसी पहलु से जुड़ी होती है। आपका हर कदम, मुँह से निकला शब्द, दूसरों के प्रति व्यवहार इतियादी सब कुछ तो आपकी personality दर्शाता है। Personality कोई कमीज तो है नहीं जो कभी भी बदली जा सकती है बल्कि यह वो हमारा व्यक्तिगत व्यक्तित्व है जो एक खुली किताब की तरह सबको दिखता है। 

जरूरी नहीं की जो भी बात आप को ठीक लगे वही सत्य हो। अपने आचरण यानि behavior को थोड़ा दूसरों के अनुसार ढाल के देखो, जीवन में खुद ही चैन, शान्ति और ठहराव आ जाएगा।  

नीचे लिखी बाप-बेटी के बीच होती एक काल्पनिक बातचीत आपको इस बात को समझने में सहायक होगी। 

बेटी जब पैदा होती है तो मानो घर में एक किसम का उजाला सा हो जाता है। चारों तरफ खुशियाँ भी ख़ुशी मनाने में लग जाती हैं। यही सब मेरे साथ भी हुआ जब हमारे घर में बेटी के कदम पड़े। मेरे अंदर एक नयी भावना ने जनम लिया कि अब मैं एक बेटी का बाप बन गया हुँ। मेरी ख़ुशी का ठिकाना ना था जब मैंने उसको पहली बार अपनी गोद में लिया। बस आँखों से प्रेम के अश्रु थम ही नहीं रहे थे। 

और फिर ना जाने कब वो बेटी बड़ी हो गयी। इतनी बड़ी कि एक दिन पत्नी ने मुझे टोक ही दिया ” अब ये सयानी हो गयी है, कोई लड़का देखना चाहिए।” मानो, किसी ने सोते से जगा के घड़ा भर पानी उड़ेल दिया हो।

बेटी की शादी का सुन मन और आंखें दोनों भर आए। अभी तो पूरी तरह से उसका चहकना और खिलखिलाना महसूस भी नहीं किया था। इसी उधेर बुन में पड़ा था कि सामने से बेटी आती दिखाई दी। 

बेटी को देख पिता का प्रेम उमड़ पड़ा और अपने पास बुलाया। उसके सर पर हाथ फेरते हुए मैं बोला। 

” मैं तेरे लिए ऐसा पति खोज कर लाऊँगा जो तुझे हमेशा प्यार करे, तेरी हर इच्छा पूरी करे, तेरे आँखों में कभी आँसू ना आने दे, तुझे इज़्ज़त दे।”

” पर क्यों पापा।” बेटी ने पूछा। 

” क्योंकि बेटे, हर बाप का सपना होता है कि उसकी बेटी का विवाह किसी राजकुमार से हो जो उसे सुखी रखे, ढेर सा प्यार और खुशियाँ दे।”

” पर पापा, राजकुमार जैसे पति से तो नाना जी ने भी अपनी बेटी का विवाह किया था। मगर आप तो हमेशा मम्मी पर चिल्लाते रहते हो, उन्हें  रुलाते हो, कभी प्यार नहीं करते।”  ” क्या आप अच्छे वाले राजकुमार नहीं हो।” 

बेटी की बात सुन मैं दंग सा रह गया। चेहरा लटक गया और शर्मिन्दगी सी महसूस हुई। ये सच था, अपने को तो मैं राजकुमार से कम नहीं समझता था, लेकिन अपनी पत्नी को कभी राजकुमारी नहीं समझा। प्यार के मीठे बोल सुनने को तरसा दिया उसे मैंने। आज लगा कि उस बाप का क्या हाल होता होगा जिसके दिल दिल के टुकड़े को मैं घर तो ले आया पर कभी सुख और खुशी नहीं दे पाया। 

अब आप भी सोचिए, बाप बनने के बाद अपने दिल के टुकड़े को दुःख मिले तो कैसा दिल टूट जाता है। वैसा ही हाल मेरी पत्नी के पिता का भी होगा जिसके दिल के चाँद को मैं सहेज कर ना रख पाया। 

अगर आप की बेटी आपके दिल का टुकड़ा है तो आपकी पत्नी भी किसी की आँख का तारा है। 

अपनी पत्नी को प्यार और इज़्ज़त दीजिए, वो भी किसी की बेटी है। 

 

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