नीतू का रिश्ता आया-Comedy Story for Kids

चाचा ने जब लड़के की इतनी तारीफ की तो नीतू के माता-पिता की ख़ुशी का ठिकाना न था। इतनी प्रशंसा सुन नीतू भी उस लड़के को देखने के लिए फ़ौरन तैयार हो गई। चाचा ने बातचीत  कर अगले हफ्ते इतवार के दिन लड़की के घर दोपहर के खाने पर लड़के वालों को बुला लिया। 

मगर, इतवार के दिन किसी कारणवश चाचा को किसी बहुत ही ज़रूरी काम से दुसरे शहर जाना पड़ गया। चाचा ने नीतू के पिता को लड़के को अच्छी तरह से परखने की हिदायत दी और अपने सफर पर निकल गया। 
इतवार आया तो नीतू के घर में खूब चहल-पहल थी। कोई साफ़ सफाई कर रहा था तो कोई खाना बनाने में माँ का हाथ बटा रहा था। पिता श्री तो बाजार से तरह-तरह की मिठाइयां ले आए थे जिन्हे अब थाल में सजाया जा रहा था। सबके दिल में ख़ुशी और चेहरे पर मुस्कान थी। आखिर घर की एकलौती पुत्री का रिश्ता जो होने वाला था। 12 बजे तक सब कुछ तैयार हो गया, और इंतज़ार शुरू हुआ लड़के वालों का। 
घर के बाहर एक तांगा रुका और उसमें से लड़के वाले एक-एक कर उतरने लगे। नीतू के माता-पिता ने आगे बढ़ कर उनका स्वागत किया और अंदर घर में ले गए। जब सब बैठ गए तो नीतू के पिता ने उनसे पूछा ” लड़का नहीं आया क्या।” सवाल सुनते ही एक बुजुर्ग महिला ने कहा ” वह अपने भाई के साथ साइकिल रिक्शा से आ रहा है, बस आता ही होगा।”
और तभी एक रिक्शा घर के बाहर रुका और एक नौजवान और एक कोई 10-12 साल का लड़का उसमें से उतर घर में दाखिल हुए। 
नौजवान को देखते ही नीतू के पिता की तो मानो सारी उमीदों पर जैसे पानी पड़  गया था। नीतू की माँ का भी यही हाल था। बड़े ही अनमने ठंग से चाय पानी पिलाते रहे जैसे कोई किसी अनचाहे मेहमान का स्वागत करता है। इधर उधर की बातें चलती रही और न नीतू को बाहर कमरे में बुलाया गया और न ही लड़के से कोई खास बातचीत की गयी। लड़के वाले भी इस रूखे व्यवहार से व्याकुल हो उठे और थोड़ी देर वहां बैठ उनसे विदा ले चल पड़े। 
उनके जाने के बाद नीतू कमरे में आयी और आते ही पुछा ” मुझे क्यों नहीं मिलवाया लड़के से।” उसके पिता जो ऐसे लड़के की सिफारिश करने के लिए चाचा को बुरा-भला कह रहे थे बोले ” क्या मिलवाना था, हमें ही लड़का पसंद नहीं आया। लड़का तो लंगड़ा था।” 
बात आयी गयी हो गयी और सब अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त हो गए। कुछ दिन बाद चाचा घर आया और नीतू के माता-पिता से उलाहना करने लगा 
” आपने तो मेरी नाक ही कटवा दी, इतना अच्छा लड़का चुना था नीतू के लिए लेकिन आपने तो उनको ढंग से पानी तक नहीं पुछा।” नीतू के पिता का सब्र टूट गया और उन्होंने चाचा को आड़े हाथों लिया 

” मेरी बेटी में क्या बुराई है जो उसे एक लंगड़े लड़के के हाथों बाँध दूँ, तुम्हे तो शर्म आनी चाहिए जो एक लंगड़ा लड़का उसके के चुना।” यह सुन चाचा हैरान सा उनके मुँह को ताकने लगा। 

” भाई साहब, आप क्या कह रहे हैं, उस लड़के और उसके परिवार को मैं अच्छी तरह जानता हूँ। उनके दोनों बेटों में से तो कोई भी लंगड़ा नहीं है।”

तब नीतू के पिता ने कहा ” मगर जब वो यहाँ आया था तो लंगड़ा रहा था, और उसको लंगड़ाते मैंने ही नहीं, सबने देखा है।” चाचा भी हैरान परेशान हो गया और चुपचाप वहां से निकल पड़ा। 
चाचा ने लड़के वालों से संपर्क किया और इस लँगड़ेपन का मामले उठाया। यह सुन लड़के वालों ने खूब ज़ोर ज़ोर से हंसना शुरू कर दिया। जब उनके हंसने का कारण चाचा को पता चला तो चाचा भी उनके साथ ठहाके लगाने लगा। 
चाचा जब नीतू के घर पहुंचा तो उसके मुँह पर हंसी खेल रही थी। अंदर आ कर उसने पूरी बात नीतू और उसके माता पिता को बताई तो पहले तो वह सब बहुत शर्मिंदा हुए, मगर कुछ देर बाद चाचा के साथ मिल कर ठहाके लगाने लगे। 
असल में हुआ कुछ यूं था कि देर से पहुँचने पर किसी को बुरा न लगे इसलिए लड़का जल्दी से रिक्शा से उतरने लगा। इसी जल्दबाजी में उसकी चप्पल टूट गयी।  
उस टूटी चप्पल की वजह से वो लंगड़ा कर चल रहा था। 
इन हलकी-फुलकी बातों को आधार मान किसी को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। 

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