नकलची कौवा-Hindi Stories for Kids

खाने की तलाश में कौवा दिन भर इधर-उधर भटकता रहता।  पेड़ से गिरे फल उठा कर खाना तो बस पेट भरना ही था। लेकिन उसके मन की भूख शांत न होती। उसे तो चाहिए था किसी छोटे जानवर का गोश्त। 

हफ़्तों भटकने के बाद कभी उसे किसी मरे हुए जानवर का गोश्त मिल तो जाता, मगर खुद मार कर खाने का तो मजा ही कुछ और होता है। घंटों पेड़ पर बैठा नीचे देखता रहता कि कोई छोटा सा जानवर दिखे जिसे वह मार सके। 
मगर जैसी ही उसकी नज़र किसी छोटे जानवर पर पड़ती और वह उस पर झपटने की सोच रहा होता, तभी उप्पर से चील तेजी से उड़ती हुई आती और झपट्टा मार जानवर को अपनी चोंच में फंसा ले जाती। बेचारा कौवा लाचार सी नज़रों से देखता ही रह जाता। 
अक्सर सोचता कि अगर चील इतनी उचाई से शिकार देख कर उस पर झपट सकती है तो उसे भी वैसा ही करना चाहिए। और एक दिन उसने मन बना लिया कि जैसे ही कोई छोटा जानवर उसे दिखेगा वह भी चील की तरह उस पर झपट कर अपनी चोंच में फसा लेगा। 
अगले दिन ही उसे मौका भी मिल गया। कौवे ने देखा पेड़ के नीचे एक चूहा फुदक रहा था। चूहा तो उसका सबसे मन पसंद भोजन था। बस फिर क्या था, चील की तरह चूहे पर झपट पड़ा। लेकिन जैसे ही कौवे ने झपट्टा मारा चूहा भाग बिल में घुस गया। और कौवे जी की चोंच खाली जमीन पर जा लगी। जमीन पर चोंच लगते ही कौवा दर्द के मारे जोर-जोर से रोने लगा। 
उसके रोने की आवाज सुन दुसरे कौवे वहां जमा हो गए। सारी बात पता चलने पर उन्होंने उसे समझाया। 
चील तो बहुत तेजी से उचाई से नीचे आती है कि शिकार को सँभालने का मौका ही नहीं मिलता। और इतनी तेजी से कौवे नहीं उड़ सकते। 
दर्द से कराहता हुआ कौवा समझ गया कि चील की नक़ल करने से कुछ नहीं होगा और उसने किसी की भी नक़ल न करने की कसम खायी। 
तभी कहते हैं, नक़ल से नहीं अकल से काम करना चाहिए। 

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