दो कुत्तों की दोस्ती – Story for Kids

 

 

पहाड़ों में बसे एक गाँव में एक चौधरी साहिब की बड़ी सी हवेली में शेरू और टॉमी नाम के दो कुत्ते रहते थे। 

उन दोनों कुत्तों को एक दूसरे से बेहद लगाव था। एक दुसरे को देखे बिना चैन नहीं पड़ता था। कभी आपस में खेलते तो कभी एक दुसरे को चाटते। 
सारा दिन इधर उधर भागना, कभी हरी घास पर लोटना तो कभी उड़ते पंक्षियों के साथ रेस लगाना। कभी चौधरी साहिब के पीछे पीछे बाजार चले जाना, तो कभी मन ना  हो तो आंखें मूँद कर पड़े रहना। गांव के दुसरे कुत्तो के साथ कभी जंगल की तरफ निकल जाना तो कभी झुण्ड बना कोई खेल खेलना। खाने पीने की चिंता नहीं थी। हवेली से उन्हें भरपेट भोजन मिल जाता था। गांव के स्वस्थ वातावरण के कारण दोनों खूब फल फूल रहे थे। बस मस्ती में दिन बीत रहे थे। 
एक दिन चौधरी साहिब के बेटे सुरिंदर ने शहर जाने का फैसला किया। पिता ने उसे अपने साथ शेरू को ले जाने को कहा तो वह मान गया। अगले दिन सुबह जब घर के बाहर खड़ी मोटर गाड़ी में सामान रक्खा जा रहा था तो दोनों शेरू और टॉमी वहां दौड़ कर पहुँच गए। दोनों उसमें सवार हो घूमना चाहते थे। लेकिन चौधरी के बेटे ने उन्हें पीछे हटा दिया। दोनों बहुत मायूस से हो गए। अब तक सामान रक्खा जा चुका था। चौधरी के बेटे सुरिंदर ने पकड़ कर शेरू को गाड़ी में बैठाया और गाड़ी चल पड़ी। 

अरे ये क्या हुआ, शेरू तो सैर करने चल पड़ा और मैं पीछे रह गया। यह सोच टॉमी भी गाड़ी के पीछे भोंकते हुए दौड़ने लगा। कुछ दूर दौड़ने के बाद बहुत दुखी मन से वो हवेली लौट आया। सारा दिन, पूरी रात वो शेरू के लौटने का इंतज़ार करता रहा। लेकिन कौन समझाता उसे कि शेरू तो शहर जा चुका था। 
अब टॉमी का मन उदास रहने लगा। शेरू बिना उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता था। ना खेलने जाता, ना ही और कुत्तों के साथ मस्ती करने। खाना तक बेमन से खाता। उसे शेरू की बहुत याद आती और वो रो पड़ता। 
दिन बीतते गए और फिर कुछ महीनों बाद चौधरी साहिब का बेटा शेरू को साथ ले गांव वापिस आया। उसे दकह टॉमी बहुत खुश हुआ। दोनों ने एक दुसरे को गले लगाया और बहुत देर तक खेलते रहे। दोनों बहुत खुश थे। टॉमी बहुत ही उत्सुकता से शहर के बारे में जानना चाहता था कि तभी टॉमी की नज़र शेरू के गले में बंधे एक पट्टे पर गयी। अरे यह क्या है ?
पूछने पर शेरू ने बताया कि शहर में तो मुझे बाँध कर रक्खा जाता है। सिर्फ घर में मैं खुला घूम सकता हूँ। जब भी बहार जाओ तो ये पट्टा मेरे गले में होता है। वहां ना तो दुसरे कुत्तों से दोस्ती होती है ना खुली हवा में दौड़ भाग। बस सारा दिन घर में ही रहो। जब किसी का दिल किया तो मेरा पट्टा पकड़ मुझे बाहर ले जाते हैं। भाई, मैं तो अपने को भग्यशाली समझता था कि मैं शहर आ गया। लेकिन कुछ दिनों बाद धुटन भरी शहर की जिंदगी ने मेरा सारा जीवन ही बर्बाद कर दिया। इतना कह दोनों एक दूसरे के गले लग बहुत देर तक रोते रहे। 
अगली सुबह चौधरी साहिब ने शेरू का पट्टा खोल दिया, क्योंकि शहर की भाग दौड़ भरी जिंदगी उनके बेटे को भी पसंद नहीं थी।  शेरू अब शहर नहीं जाएगा। 
बस फिर क्या था, टॉमी और शेरू को तो मानो जीवन दान मिल गया हो। 
शहर क्या और गाँव क्या, अपनों से बिछड़ कर दूर जाना हमेशा ही पीड़ाजनक होता है। हमें हमेशा अपने मित्रों, परिवारजनों के साथ और प्यार की आवश्यकता होती है। 

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