डर को निकाल फेंको- Self Confidence

याद है कैसे शोले फिल्म के गब्बर सिंह से सारा रामगढ़ गाँव डरता था। 

कभी सोचा है की ये डर क्या है। ये डर उस चिड़िया का नाम है जो चाहते हुए भी उड़ती नहीं, हमेशा डरती रहती है कि कहीं उड़ते उड़ते गिर ना जाए। कुछ लोग अपने मन में एक डर पाल लेते हैं और फिर उसी डर से डरते हुए जीवन गुजार देते हैं। एक डर ही है जिसके चील की तरह बड़े पंख होते है। कभी इस डाली पर तो कभी उस डाली पर अपना कब्ज़ा जमा लेते हैं। और वो डाली कोई और नहीं बल्कि आप हो और आप जैसे ना जाने कितने दुसरे लोग हैं।   
डर से मन में घबराहट होने लगती है, सर्दी के मौसम तक में पसीना आने लगता है, सांसें तेज हो जाती हैं मानो मीलों लम्बी दौड़ लगा कर आ रहे हों। ये लक्षण दर के कारण अपने आप ही उजागर हो जाते हैं और इंसान इन्हे छुपाये नहीं छुपा सकता। इन्ही लक्षणों को देख डराने वाला आपसे अपनी मन मर्जी काम करवाता है और आप न भी नहीं बोल पाते। 

मेरा ये तर्क अपने जीवन भर के तजुर्बे का निचोड़ है। मिसाल के तोर पर नीचे लिखी एक काल्पनिक स्तिथि को पढ़ें। 

बस कुछ इसी तरह एक बाजार के दुकानदार माली नाम के बदमाश से डरते थे। जब भी वो बाजार में आता तो लोग उससे बचने के लिए दुकानदार चुपचाप एक पहले से बंधी रकम उसके हाथ पे रख देते। कोई अगर थोड़ी बहुत आनाकानी करता तो उसे पकड़कर माली बदमाश खूब मारता और गालियां देता। 
एक को मार पड़ती तो दूसरा कोई उसे बचाने नहीं आता बल्कि डर कर अपनी कमाई उस बदमाश को सौंप देता। ये चक्कर ना किसी ने तोड़ने की कोशिश की और ना ही किसी ने कभी सोचा। सोचते भी कैसे वो सब तो इंसान के सामने हथियार डाल चुके थे। उसे देखते ही उसकी मार और गालियां याद आ जाती और सब खामोश हो उस अत्यचार को सहते रहते। 
दीवाली आने वाली थी और बाजार में रौनक भी खूब थी। माली बदमाश खुश था कि त्यौहार के मौके पर तो खूब वसूली होगी। और इस उम्मीद में अपना सीना फुला के बाजार पहुँच गया। डर के मारे दुकानदार ने बिना कुछ कहे उसे पैसा देना शुरू कर दिया। एक से लिया, दुसरे से लिया और इस तरह वो पैसा लेता और आगे बढ़ता रहा। अब ध्यान से आगे पढ़ो कि दुकानदारों का माली नामक डर कैसे दूर हुआ। 
अक्सर, बाजार घनी आबादी वाले इलाकों के आस पास ही बनाए जाते हैं। दिवाली का त्यौहार था सो एक घर में कुछ बच्चे पटाके चला रहे थे और मौज मस्ती कर रहे थे। एक बच्चे का दुसरे बच्चों से झगड़ा हो गया तो उसने सबको सबक सिखाने के लिए एक पटाखों की बड़ी सी लड़ी में आग लगा दूर फ़ेंक दिया। इसे दुकानदारों की किस्मत कहिये या बदमाश की बदकिस्मती, वो पटाखों की जलती हुई लड़ी बदमाश के पास गिर फटने लगी। 
एक के बाद एक बम फटते और उनमें चिंगारियां निकलती। ऐसे समय तो कोई भी डर जाता और भाग खड़ा होता। यही हाल उस बदमाश का हुआ। अचानक हुए पटाखों के हमले से वो डर गया और भागने लगा। कुछ दूर जा रुका तो उसका चेहरा डर से सफ़ेद हो चुका था और वो काँप रहा था। 
पटाखों की आवाज़ तो बंद हो गयी लेकिन उस आवाज़ से डर के भागते और कांपते बदमाश का नज़ारा सब दुकानदारों ने देखा। सब बाहर निकल इस दृश्य को निहार एक दुसरे का मुँह देखने लगे। 
सबके मन में एक ही प्रश्न गूँज रहा था, जिसे एक दुकानदार ने इन शब्दों से दर्शाया, जो सिर्फ पटाखों की आवाज़ से इतना डर गया हो, क्या हम बेकार में इस व्यक्ति से डर रहे थे।
 
उस दुकानदार के कहे शब्द सबके मन में समा गए और एक एक कर सबके चेहरे से बदमाश नमक डर दूर होता दिखलाई देने लगा। 
बस फिर क्या था, अगले दिन जब वो बदमाश बाजार में आया तो सब ने इकट्ठे हो उसे भगा दिया। 
अब आप सोचो कि किसी बात से डरना कहाँ तक उचित है। डर अगर आपके के अंदर है तो वही डर ना जाने कितने लोगों के अंदर भी निवास कर चुका है। और ये डर सिर्फ डराता ही नहीं बल्कि जीवन को नर्क सा बना देता है। डर आपके वर्तमान और भविष्य दोनों को जकड़ लेता है और आप अपने को लाचार सा महसूस करते हैं। इस डर के कारण आप कई बार ऐसे फैसले ले लेते हैं जो आपके लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं। 
किसी बुरी घटना के होने पर डरना स्वाभाविक है। ये प्रकृति ने हमारे बचाव के लिए ही बनाया है ताकि हम आने वाले समय में सचेत रह सकें। सचेत रहे लेकिन उस डर को अपने अंदर बैठने ना दें। जो भी डर आपके मन में घर कर चुका है वो एक दिन में नहीं निकलेगा। उससे छुटकारा पाने के लिए आपको खुद ही कोशिश करनी होगी। 
उस डर का सामना करें, जैसे किसी को अनजान लोगों से बात करने में डर लगता है। लोगों से बात ना करनी पड़े इस लिए किसी पार्टी या ऐसे समारोह में जाते ही नहीं। इन्हे घर पर अकेले बैठना ही पसंद होता है। कोई इंग्लिश में बात कर रहा हो तो डर के मुँह से शब्द भी नहीं निकलता। 
ये सब डर आपने खुद ही पाल रक्खे हैं। घर से बहार निकलिए, अनजान हो या इंग्लिश बोलने वाला हो, कोई आपको काटेगा नहीं। और कुछ नहीं तो सुबह घूमने के बहाने पार्क में जाएं और शुरू में लोगों से सिर्फ गुड मॉर्निंग कहें। आप देखेंगे कैसे लोग मुस्करा कर आपकी गुड मॉर्निंग का जवाब देते हैं। आप इस आजमा कर देखें और फिर मुझे बताएँ कि कैसा रहा। 
दोस्तों! उस डर से डरो नहीं बल्कि हिम्मत कर उसे अपने अंदर से निकाल फेंको ताकि आप जीवन सुखमय और शान्ति पूर्वक व्ययतीत कर सकें। 

 

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