गुस्से पर काबू

रोहित पढाई लिखाई, खेल कूद में हमेशा फर्स्ट आता था। स्कूल में सब अध्यापक उससे बहुत प्रभावित थे और उसकी तारीफ करते थे। 

लेकिन, इतना होनहार होने के बावजूद भी सब सहपाठी उससे से नफरत करते थे। यहाँ तक के उसके साथ क्लास में बैठने से भी कतराते थे। स्कूल में लंच के वक़्त कोई भी उसके साथ टिफ़िन नहीं खाता था। 
इस नफरत का कारण था रोहित का गुस्सा। छोटी छोटी बातों पर उसे झट से गुस्सा आ जाता और उस गुस्से में ना जाने क्या कुछ उल्टा सीधा बोल देता। अध्यापक के सामने तो बोलने के हिम्मत नहीं थी सो अपना सारा गुस्सा अपने सहपाठिओं पर निकालता। कब तक सहते, सो सब सहपाठिओं ने मिल कर रोहित का बहिष्कार करने का फैसला लिया। इसी कारण अब वो अकेलापन महसूस करने लगा था। 
ये सब रोहित के सबसे प्रिय अध्यापक भी समझ चुके थे। उन्हें जब उसकी चिंता होने लगी तो उन्होंने एक दिन छुट्टी के बाद रोहित को रोक लिया। अकेले में उसे समझाया और एक सुझाव दिआ जिसका पालन उसे एक महीने तक करना था। रोहित मान गया। 
सुझाव ये था कि जितनी बार भी रोहित को गुस्सा आए और वह किसी को करवी बात बोले तो उसे अपनी कापी में एक काटा लगाना होगा। रोहित ने ऐसा ही किया। पहले दिन उसने 8 काटे लगाए, दुसरे दिन 9, तीसरे दिन 6 और इस तरह उसने रोज़ अपने गुस्से के अनुसार काटे लगाना शुरू कर दिया। 
15 दिन बाद अध्यापक ने जब कापी की जाँच की तो देखा कि पहले कुछ दिन छोड़ बाकी दिनों में काटे काम होते जा रहे थे। उन्होंने उसे और अच्छा करने का बढ़ावा दिया और एक नया सुझाव दिया। 
सुझाव ये था कि अब जितनी बार भी गुस्सा आने पर रोहित अपने पर काबू कर गुस्सा नहीं करे उस समय एक काटा मिटा दे। रोहित झट से तैयार हो गया। 

अब वो हमेशा कोशिश करने लगा कि वो गुस्सा ना करे या किसी से कोई बुरी बात ना बोले। जब भी वो अपने पर काबू रखता वो एक काटा मिटा देता। 
इस तरह 15 दिन और बीत गए। उन अध्यापक महोदय ने रोहित से उसकी काटों वाली कापी मांगे तो देख हैरान हो गए। रोहित ने सब काटे मिटा दिए थे। खुश हो उन्होंने उसे गले से लगा लिया और कहा कि आगे से अपने गुस्से और जबान पर काबू रक्खे ताकि उसकी बात या व्यवहार से किसी को बुरा ना लगे। 
जब रोहित जाने लगा तो अध्यापक ने उसे फिर से कापी खोलने को कहा। कापी दिखा बोले 
” देखो, काटे तो सब मिट गए लेकिन मिटाने से कापी कितनी गन्दी हो गयी है। इसी तरह करवा बोल और बुरा व्यवहार भी तुम्हारे रिश्तों को गन्दा कर देता है।”
अच्छा बोल और व्यवहार रिश्तों को मधुर और मजबूत करता है। 

Also Read:


Your comments encourage us

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.