गाय का बटवारा – Moral story

 

गाँव में एक किसान अपने परिवार के साथ रहता था। उसके दो बेटे थे। एक का नाम राधे और दूसरे का श्याम। 
 

 
परिवार की सारी पूँजी थी एक गाय जिसका दूध बेच कर जो कुछ कमाते बस उसी में गुजरा कर लेते थे। कोई खेत खलिआन तो था नहीं। 
 
 

राधे तो पिता भक्त और सही रह पर चलने वाला था। लेकिन श्याम आवारा किस्म का लड़का था जो पिता की किसी भी बात की परवा नहीं करता था। 
 

 
एक दिन श्याम ने अपने पिता से बटवारा करने की बात कही तो पिता और राधे दंग रह गए। 
 

 
उन्होंने दोनों बेटों को अपने सामने बैठाया और पूछा कि गाय तो एक है फिर बटवारा कैसे हो। राधे तो सीधा सा लड़का था सो चुप रहा। 
 
 

लेकिन श्याम बहुत ही चालाक था सो बोल पड़ा ” गाय के आगे का भाग राधे का और मेरा पीछे का।”
राधे और पिता चुपचाप मान गए। श्याम बहुत खुश हुआ ये सोच कर की कैसे अपने भाई को उल्लू बनाया। 
 

 
बटवारे के अनुसार, अगले दिन से राधे सारा दिन गाय को चारा खिलाता, क्योंकि अगला भाग उसका था। 
और श्याम, पिछले भाग का मालिक होने की वजह से उस गाय का दूध दोहता और बाजार में बेच देता। 
 

 
महीने भर ये चलता रहा। महीना ख़तम होने पर जब राधे ने दूध की कमाई से आधा भाग माँगा तो श्याम बोला 
” काहे का आधा पैसा, गाए का पिछला भाग मेरा है, उससे जो कमाई होगी वो मेरी।” बेचारा राधे मायूस हो चुप हो गया। 
 
 

 
अगले दिन सुबह जब राधे गाय को चारा खिला रहा था तो उसके पिता ने उसके कान में कुछ कहा। उसने सुना और थोड़ा मुस्करा पड़ा। 
 

 
कुछ देर बाद श्याम बाल्टी ले गाय का दुध दोहने लगा तो राधे ने जोर से गाय के मुँह पर थप्पड़ मारा। 
 

 
 
थप्पड़ खा गाय ने जोर से अपने पिछली टाँगो से श्याम को लात मर दी। लात लगने से राधे को चोट तो लगी ही साथ में सारा दूध भी बिखर गया, श्याम चिल्ला उठा ” अबे, राधे क्या पागल हो गया है।” तब राधे ने जवाब दिया 
 

 
” अरे श्याम, गाय का अगला भाग मेरा है भाई, मैं चाहे जो भी करूँ।”
 

 
ये जवाब सुन श्याम शर्मिंदा हुआ। अब सारी बात उसके समझ में आ गयी थी। और उसने पिता और भाई से माफ़ी माँगी। 
 

 
और एक बार फिर सारा परिवार एक साथ मिल जुल कर रहने लगा। 


 

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