गरीब किसान की महानता

हम चारों दोस्त जंगल में रास्ता भटक चुके थे। इसका एहसास हमें तब हुआ जब घंटा भर तेज चलने के बाद फिर से हमें वही छोटा सा झरना दिखाई दिया। 

रात होने को थी और दूर दूर तक कोई इंसान या आबादी वाला इलाका नहीं था। डर, घबराहट तो थी ही लेकिन साथ में भूख से जान निकले जा रही थी। झरने से थोड़ा पानी पी अपनी प्यास बुझाई और फिर विचार करने लगे कि कैसे इस जंगल से बाहर निकला जाए। 
सबने मिल कर ये नतीजा निकाला कि क्यों ना इस बार दूसरी तरफ से रास्ता ढूंढ़ने की कोशिश करें। और हम चल पड़े। नुकीले पत्थर, कंटीले झाड़, कहीं फिसलन तो कहीं बड़ी चट्टानें, जंगली जानवरों का डर अलग सता रहा था। पर करते क्या, रुक तो सकते नहीं थे। सो तेजी से कदम उठाते हुए चलते गए। 
लेकिन कुछ समय चलने के बाद महसूस किया कि जंगल तो और भी घना होता जा रहा था। अब तो हमारी हिम्मत भी जवाब देने लगी थी। अँधेरा हो चुका था और कुछ भी दिखाई देना बंद सा हो गया था। हम कोई टोर्च लेकर भी नहीं चले थे क्योंकि सोचा था शाम से पहले ही बाहर निकल आएंगे। चारों निराश हो भगवान को याद करने लगे मानो अपना अंत समय ही आगया हो। 
आंखें अभी अँधेरे में देखने लायक भी नहीं हुई थी कि तभी हमें एक हलकी सी रोशनी की झलक दिखाई दी। इतने घने जंगल में रोशनी का मतलब था कि कोई इंसान वहां है। हमने जोर जोर से ‘बचाओ’ ‘बचाओ’ चिल्लाना शुरू कर दिया। हम बिना रुके चिल्ला रहे थे ताकि जो कोई भी हो उसे हमारी आवाज पहुँच जाए। 
तभी वो रोशनी हमारे करीब आने लगी। और कुछ पलों में हमसे सिर्फ 100 फुट की दूरी पर आ रुक गयी। रोशनी को इतना पास देख हमने चिल्लाना बंद किया तो वहां से आवाज आयी ” अरे, कितने देर से मैं चिल्ला रहा हूँ कि आ रहा हूँ, लेकिन तुम चिल्लाना बंद करो तो सुनाई पड़ता ना। ” हमारी जान में जान आयी। मानो, कोई भगवान का अवतार ले हमारी रक्षा के लिए आ गया हो। 
फिर छपाक की आवाज हुई और वह आदमी हमारे पास आ पहुँचा। अपनी लालटेन ऊपर उठा हमें देखा और बोला ” इतनी रात में तुम सब जंगल में क्या कर रहे हो। ” तब हमने उसे अपने रास्ता भटक जाने की कहानी सुनाई। 
इतना सुन वो बोला ” अच्छा हुआ तुम मुझे मिल गए, नहीं तो रात भर जंगल में तो जंगली जानवरों को भोजन में मजा आता। ” ” अरे पागलो, अगर इस नहर को पार कर लेते तो जंगल से बाहर निकल आते। ” मगर हमें इतनी रात में कौन बताता। खैर, ये सब सुब जान में जान आयी। फिर उसने हमें उसके घर चल रात बिताने को कहा और कहा कि सुबह मैं तुम्हे जंगल से बाहर निकाल दूंगा। उसके लालटेन के सहारे हम उसके घर तक पहुँच गए। 
फिर वो हमें अपने घर ले गया। उसने फिर हम चारों को जो रूखा सूखा उसके पास था खिलाया और सोने को कहा। सुबह से भूखे पेट में जब थोड़ा सा भोजन गया तो नींद ने तुरंत आ घेरा और हम सब सो गए। 
सुबह उठे और उसके घर से बाहर आये तो देखा कि उस आदमी का घर तो एक टूटी फूटी झोपड़ी जैसा था। सुबह की रोशनी में उस आदमी को देखा तो उसके फटे पुराने कपड़े दिखाई दिए। उसने बताया कि वह एक गरीब किसान है जो छोटी सी खेती बाड़ी कर अपना और अपने परिवार का गुजरा करता है। उसके परिवार में उसकी पत्नी और एक बेटा था जो पास के गांव में किसी रिश्तेदार के यहाँ 2 दिन के लिए गए हैं। और पूछने पर उसने यह भी बताया कि उसका बेटा कभी स्कूल गया ही नहीं क्योंकि उस छोटी सी खेती में मदद करता था। 
उसकी गरीबी की यह कहानी सुन हमारी आँखों में आंसू आ गए। इतना गरीब आदमी मगर दिल का इतना धनी। बिना जान पहचान के उसने हमें सहारा और खाने पीने को दिया। तभी वो मुस्कराता हुआ हमसे फिर कुछ खाने को कहने लगा ” कुछ खा लो, जंगल से बाहर निकलने के लिए तुम्हे अभी काफी चलना है। ”  और वो अपने झोपड़े के अंदर से हमारे लिए खाने को ले आया। हमने नाश्ता किया और फिर वो हमारे साथ घंटा भर चल हमें बाहर जाने का रास्ता दिखा वापिस चल दिया। 
हम अपने घर सकुशल पहुँच गए। इस यादगार जंगल यात्रा ने हमें डरा और थका दिया था। मगर हमारी नींद उड़ा दी थी। क्या इस दुनिया में उस किसान जैसे लोग अभी भी मिलते है जो निस्वार्थ दूसरों की मदत करते हैं। 
अपने लिए जिसे खाना पूरा ना पड़ता था वो हम अनजानो को खिला रहा था। जिसका अपना घर टूटा फूटा हो वो हमें अपने घर आश्रय दे रहा था। उस इंसान की महानता को हम मन ही मन कई बार नमन करते रहे। 
इस गरीब किसान की महानता हमें सिखाती है कि जितना भी हो सके हमें दूसरों की मदत करने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। 

Also Read:


2 comments

Your comments encourage us