काम में मस्ती-Personality development

मान लिया जाए कि आप बहुत ही समझदार हैं, लेकिन दूसरों को बेवकूफ समझना कहाँ की अक्लमंदी है। चालाकी करना और फिर अपनी पीठ थपथपाना, कि मोर्चा मार लिया, को मैं सिर्फ पल भर की ख़ुशी से ज्यादा कुछ नहीं समझता। 

मेरे इस तर्क को समझने के लिए नीचे लिखी इस कहानी से आपको मदत मिलेगी। 

रोहित जिस कंपनी में काम करता था उसके मालिक ने उसे अपने कमरे में बुलाया और कहा ” रोहित, तुम ये 10 लाख रुपए बिशम्बर दास जी को पहुंचा दो।” और साथ में ये भी कहा ” देखो, रकम बहुत ज्यादा है इस लिए तुम साथ में जीवन और कमल को भी ले जाओ। और हाँ, बस से नहीं जाना, बल्कि तुम मेरी कार ले जाओ, ताकि शाम होने तक लौट आयो।” बिशम्बर दास जी का ऑफिस दुसरे शहर में था जो करीब 200 किलोमीटर दूर था। मतलब 4 घंटे जाने और 4 घंटे वापिस आने में लगेंगे। 

कुछ ही देर बाद तीनो 10 लाख रुपए बैग में डाल कर कंपनी मालिक की कार में बैठ चल पड़े। 11 बजे निकले थे, इसलिए दोपहर का खाना खाने के बाद 4 बजे वो बिशम्बर दास के ऑफिस पहुँचे और सारा रूपया उन्हें दे कर वापिस चल पड़े। 

वापसी में अभी कुछ ही दूर गए होंगे कि रोहित के दिमाग में एक योजना ने जनम लिया। कार तो है ही अपने पास, क्यों न हम आज रात कुछ मस्ती करें। बस फिर क्या था सब ने मिल कर प्रस्ताव पास किया और सब नए शहर में मस्ती करने चल दिए। प्लान ये बना कि रात भर ऐश करो और सुबह की सुबह देखेंगे। रात भर तीनों ने मिल कर खूब शराब पी और धमाचौकड़ी की, और देर रात एक होटल में जा सो गए। सुबह जल्दी उठ वो सब तेजी से वापिस चल दिए। 

उधर कंपनी मालिक भी परेशान था कि आखिर हुआ क्या। उन्होंने बिशम्बर दास जी से पूछताश की तो पता चला कि वो सब तो 4.30 के करीब वापिस निकल गए थे। तीनों के मोबाइल भी बंद पड़े थे। अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे दिमाग में लेकिन समझ नहीं आ रहा था के क्या करें। आशंकाओं से घिरे रात भर सो नहीं पाए। सुबह उठ ऑफिस पहुँच कर सोच ही रहे थे कि पुलिस को बुलाया जाए, तभी अपनी कार गेट से अंदर दाखिल होते देख रहत की सांस ली। 

तीनों अंदर दाखिल हुए और बदहवास सी शकल बना बोले ” सर, वापसी में कल कार का पंक्चर हो गया था,  एक्स्ट्रा टायर में हवा नहीं थी, सो लोगों से मदत मांग मीलों दूर जाना पड़ा तब कहीं पंक्चर वाला मिला। रात 2 बजे कार का पंक्चर लगा तो हम कुछ देर कार में ही सो गए थे।” यह पूछने पर कि तीनों के मोबाइल क्यों बंद थे तो जवाब मिला सर, बैटरी डेड हो गयी थी। 

सब सुन मालिक समझ गए कि तीनों झूठ बोल रहे हैं, लेकिन वो चुप रहे। 

कुछ देर बाद वो कमरे से निकले और एक एक कर तीनों की मेज पर पहुंचे। इधर उधर की बात कर तीनों से अलग से पूछा कि कौन सा टायर पंक्चर हुआ था। आगे का, पीछे का, राइट साइड का या बैक साइड का। 

तीनों से जवाब ले कमरे में आये और तीनों को इकठा बुला कर बोले ” पंक्चर तो एक हुआ लेकिन तुम तीनों तो अलग अलग टायर बता रहे हो। क्या बारी बारी से तीन टायर पंक्चर हुए थे।”

अब क्या था, तीनों समझ गए कि उनकी चालाकी पकड़ी गयी है। जवाब तो क्या देते बस शर्म से सर झुकाए खड़े रहे। मालिक ने नौकरी से निकाला तो नहीं, लेकिन जीवन भर के लिए एक समझ दे दी  

” काम में मस्ती ठीक नहीं।”

एक ऐसी कहानी है जो आपको याद दिलाती रहेगी कि थोड़ी सी ख़ुशी के लिए काम और कर्त्तव्य से मुँह न मोड़ो। 

यह उन्नति की ओर आगे ले जाने वाला व्यक्तित्व विकास का लेख आपको कैसा लगा?
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