करवा चौथ व्रत और कथा-Karwa Chauth Vrat and Story

करवा चौथ  
करवा चौथ विशेष रूप से उत्तर भारत में हिंदू महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय और महत्वपूर्ण दिन है। करवा चौथ मुख्य रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश राज्यों में मनाया जाता है। लेकिन कुछ समय से गुजरात राज्य, पश्चिम बंगाल और बिहार राज्य में भी महिलाएं करवा चौथ को मनाने लगी हैं। कई राज्यों में करवा चौथ को कराका चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। 
विवाहित महिलाएं अपने पति के लंबे जीवन और कल्याण के लिए एक दिन का उपवास करती हैं। महिलाएं करवा चौथ के दिन उपवास रखती हैं और किसी भी प्रकार का भोजन नहीं लेती। ज्यादातर महिलाएं शाम को चंद्रमा को देखने से पहले पानी की एक बूंद भी नहीं पीती हैं। परंपरागत रूप से, करवा चौथ उपवास केवल विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है लेकिन कई अविवाहित लड़कियों भी भविष्य में अच्छा पति मिलने की मंशा से यह उपवास रखती हैं। 
करवा और कराका दोनों एक छोटी मटकी को कहते हैं जिसे पूजा के दौरान उपयोग में लाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से अखंड सौभाग्यवती देवी पार्वती की पूजा की जाती है। देवी पार्वती की पूजा के बाद भगवान शिव, भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। महिलाएं देवी गौरव और चौथ माता की भी पूजा करती हैं जो करवा चौथ के दिन देवी पार्वती का प्रतिनिधित्व करती हैं।
करवा चौथ से एक दिन पहले महिलाएं अपने हाथों और पैरों में मेहँदी लगवाती है। सुबह सूर्योदय से पहले थोड़ा सा नाश्ता करती हैं। इस नाश्ते में अक्सर उनके पति उनका साथ देते हैं। सारा दिन कुछ खाये या पीये बिना उपवास रखती हैं। करवा चौथ की पूजा से पहले खूब सज संवर जाती हैं। शाम को रीति-रिवाज से करवा चौथ की पूजा करती हैं। इस पूजा के दौरान कोई भी एक महिला करवा चौथ की कथा सुनाती है। रात को चंद्रमा को एक छलनी के माध्यम से देखती हैं। चन्द्रमा को जल चढाती हैंऔर फिर पति को देखती हैं। अपने पति के हाथों पानी पीकर अपना उपवास तोड़ती हैं। और फिर सब मिलजुल कर भोजन ग्रहण करते हैं। 
करवा चौथ व्रत कथा
बहुत समय पहले, इंद्रप्रस्थपुर शहर में वेद शर्मा नाम का एक ब्राह्मण था। वेद शर्मा की लीलावती से शादी हुई थी और उनके सात बेटे और वीरवती नाम की एक बेटी थी। सात भाइयों की अकेली बहन होने के कारण वह न केवल अपने माता-पिता बल्कि भाइयों के लाड़ प्यार में पली बड़ी हुई। 
जब वीरवती बड़ी हो गयी, तो उसकी शादी एक उपयुक्त ब्राह्मण लड़के से कर दो गयी। शादी के बाद, जब वीरवती अपने माता-पिता के घर पर थीं, तो उसने अपने पति के लंबे जीवन के लिए करवा चौथ का उपवास रखा। दिन भर लम्बे उपवास को वह सहन न कर पायी और कमजोरी के कारण वह बेहोश हो कर जमीन पर गिर गई।
सभी भाई अपनी प्यारी बहन की दुखी स्थिति सहन नहीं कर सके। वे जानते थे कि पतिव्रता वीरवती, तब तक कोई भोजन नहीं लेगी जब तक कि वह चंद्रमा को न देख ले। 
उसके स्वास्थ को ध्यान में रख सभी भाइयों ने अपनी बहन के उपवास को तोड़ने के लिए उसे धोखा देने की योजना बनाई। भाइयों में से एक छलनी और दीपक के साथ दूर लगे वट के पेड़ पर चढ़ गया। जब वीरवती को होश आया तो बाकी भाइयों ने उसे बताया कि चंद्रमा उग आया है और उसे चंद्रमा को देखने के लिए छत पर ले आये। वीरवती ने एक दूर वट पेड़ पर छलनी के पीछे दीपक देखा और माना कि चंद्रमा पेड़ की चोटी के पीछे उग गया है। उसने तुरंत दीपक को जल चढ़ाया और अपना उपवास तोड़ दिया।
उपवास टूटने के बाद जब वीरवती ने भोजन करना शुरू किया तो उसे कई प्रकार के अपशकुन का सामना करना पड़ा। खाने के पहले ग्रास में उसने बालों को पाया, दूसरे ग्रास लेने से पहले ही उसे छींक आ गयी और तीसरे ग्रास को तोड़ते ही ससुराल से बुलावा आगया। 
अपने पति के घर पहुंची तो सामने अपने पति के मृत शरीर को देखा। पति की मृत्यु पर उसने रोना, चीखना शुरू कर दिया और अपने को करवा चौथ के उपवास में कोई गलती करने का दोषी मानने लगी। 
उसके शोक विलाप को सुन देवी इन्द्राणी, जो भगवन इंद्रा की पत्नी, प्रकट हुई और उसे सांत्वना देने लगी।
वीरवती ने देवी इंद्रानी से पूछा कि उसे करवा चौथ के दिन ऐसा दुर्भाग्य क्यों मिली और वीरवती ने देवी इन्द्राणी से उसके पति को जिंदा करने के लिए आग्रह किया। वीरवती के पश्चाताप को देखते हुए, देवी इंद्रानी ने उनसे कहा कि उन्होंने चंद्रमा को अर्ग (चढ़ाव) देने के बिना उपवास तोड़ दिया किसके कारण उसके पति की असामयिक मौत हुई। 
इंद्रानी ने वीरवती को हर साल हर महीने चौथ उपवास का पालन करने की सलाह दी, जिसमें करवा चौथ का उपवास भी शामिल हो। और सब उपवास रखने के बाद आश्वासन दिया गया कि उसका पति जीवित वापस आ जाएगा। उसके बाद वीरवती ने पूर्ण विश्वास और सभी अनुष्ठानों के साथ मासिक उपवास रखा। 
अंत में उन उपवासों के पुण्य के कारण वीरवती ने अपने पति के जीवन को वापस ले लिया।

Also Read:



Your comments encourage us

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.