कंजूस पति-पत्नी

एक शहर में बहुत ही कंजूस पति-पत्नी रहते थे। कंजूस इतने कि हर रात खाने के वक़्त किसी न किसी दोस्त या रिश्तेदार के घर पहुँच जाते। औपचारिता दिखाते हुए पूछे जाने पर कि क्या वह दोनों भोजन करेंगे,तो झट से  उनके साथ  खाने पर बैठ जाते। 

अपनी छुट्टियां मनाने कभी एक तो कभी दुसरे के घर डेरा डाल  देते और खूब मस्ती करते। अपनी खातिर करवाना और रोज़ नए नए पकवान की फरमाईश करना तो अपना हक़ समझते थे। 
 
लेकिन जब कोई उनके घर आने की बात करता तो कोई ना कोई वजह बता उन्हें टाल देते। 
एक दिन उनकी बुआ और उनका परिवार बिना बताए उनके घर पहुँच गया। काफी देर तक गप्पे मारने के बाद कंजूस पति-पत्नी को लगा कि अब तो रात का खाना खिलाना ही पड़ेगा। मगर उनका कंजूस मन उन्हें खर्चा करने से रोक रहा था। तभी पति को एक उपाय सूझा। 
बुआ की तरफ देख पत्नी से बोला ” आज बुआ बहुत दिनों बाद घर आयीं हैं, तुम जल्दी से और कुछ नहीं तो दाल चावल और साथ में मटर पनीर बना लो। “
मटर पनीर का नाम सुनते ही पत्नी परेशान। जब देखो मुँह उठा चले आते हैं। अब मटर पनीर पर इतना खर्चा करो। मन ही मन बुड़बुड़ाती हुई पत्नी जी रसोई में जा घुसी। पीछे पीछे पति महोदय भी पहुँच गए और अपनी योजना सुनाने लगे। 
” देखो, तुम सिर्फ दाल-चावल बना लो, लेकिन   इन्हे ऐसा लगना चाहिए जैसे हम इन्हे मटर पनीर खिलाना चाहते हैं। ” पत्नी की समझ में नहीं आया तो पूछा ” ये कैसे होगा कि हम परोसें तो दाल पर उन्हें लगे कि हम उन्हें मटर पनीर खिलाना चाहते हैं। “
तब पति ने अपनी योजना बताई ” ऐसा करना की रसोई में जा दाल चावल बना लो। जब तैयार हो जाए तो मुझे आवाज लगाना कि खाना तैयार है, आप प्लेट टेबल पर लगा लो। ” पत्नी ध्यान से सारी बातें सुनती रही और आगे की योजना सुनने को बेताब होने लगी। तब पति ने अपनी असली योजना बताई। 
” जब मैं प्लेट लगा चुका हूँ तो तुम एक खाली कढ़ाई किचन के फर्श पर गिरा देना। तब में पूछूँगा कि क्या गिरा तो तुम जवाब देना ” मटर पनीर की कढ़ाई गिर गयी। मटर पनीर बचा नहीं तो दाल चावल ही खाना पड़ेगा। 
योजना अनुसार पत्नी दाल चावल बनाने लग गयी और कुछ देर बाद पति को आवाज लगाई ” खाना बन गया है, आप टेबल पर प्लेटें लगा दो। ” पति उठा और अलमारी से प्लेटें ले टेबल पर लगाने लगा। 
तभी धरराम से कुछ बर्तन गिरने की आवाज आयी। पति ने पुछा “क्या गिरा दिया ” तो पत्नी की तरफ से कोई जवाब ना मिलने पर रसोई में भागा गया। 
रसोई में दाल का पतीला जमीन पर गिरा पड़ा था। 
दोनों पति पत्नी को मानो सांप सूंघ गया हो।जब दाल ही गिर गयी तो मटर पनीर का बहाना भी फेल हो गया। 
बड़े ही दुखी मन से उनको बाजार से दाल और मटर पनीर माँगा बुआ और उनके परिवार को परोसना पड़ा। 
देखा कैसे एक कंजूस को लेने के देने पड़ गए। चले थे पैसे बचाने और बाजार से खाना मँगाने में दुगना पैसा खर्च हो गया। 

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