आलसी आदमी

 

बच्चों! आज हम आप सब को एक आलसी आदमी की कहानी सुनते हैं। 
यह अलसी व्यक्ति एक गाँव में रहता था। इतना आलसी था कि कई कई दिन तक नहाता भी नहीं था। मगर पेट तो रोज़ भोजन माँगता है। लेकिन उस आलसी व्यक्ति के मन में था कि भगवान ने उसे पैदा किया है तो वह ही उसके भोजन का इंतजाम करेगा। 
उसने ने कभी घर में चूला तक न जलाया था। जब कोई खाने को दे दे तो खा लेता नहीं तो भूखा प्यासा नदी किनारे बैठा भगवान को कोसता रहता। 

दो दिन से किसी ने भी उसे खाने को कुछ नहीं दिया था। नदी किनारे बैठ कर हवा खा कर तो पेट नहीं भरता। 
जब भूख बहुत सताने लगी तो बेचैन हो गया। 
तभी वह क्या देखता है कि नदी में एक कौआ बड़े ही आराम से तैर रहा है। हैरानी हुई, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि कौआ एक मगरमच्छ की पीठ पर बैठा था। 
उसने सोचा मैं जितना भी आलसी हूँ लेकिन यह कौआ तो मुझ से भी ज्यादा आलसी है। जो उड़ने से बचने के लिए मगरमच्छ की पीठ पर बैठ कर नदी पार कर रहा है। 
धीरे धीरे दोनों नदी किनारे पहुँच गए। नदी किनारे पहुँचते ही कौआ उड़ कर जामुन के पेड़ पर जा पहुंचा। और कुछ हो देर में उड़ कर आया और मगरमच्छ के मुँह में कुछ जामुन डाल दिए। और मगरमच्छ मजे से जामुन खाने लगा। कौआ बार बार उड़ता और जामुन अपनी चोंच में भर मगरमच्छ के मुँह में डाल देता। कुछ देर बाद अपना पेट भर मगरमच्छ वापिस नदी में चला गया और कौआ पेड़ पर बैठ जामुन खाने लगा। 
यह सब देख वह आलसी व्यक्ति सोच में डूब गया। जिसे मैं आलसी कौआ समझ रहा था वह तो बिलकुल उल्टा निकला। इतनी बार पेड़ से जामुन तोड़ उसने पहले अपने मित्र का पेट भरा और फिर अपना। 
एक कौवे ने उसकी सोच बदल दी। उसने ठान लिया कि अब से वह काम करेगा और सिर्फ अपनी मेहनत की रोटी ही खाएगा। 
बच्चों, भगवान का आशीर्वाद उन्ही लोगों को मिलता है जो मेहनत और लगन से आगे बढ़ना चाहते हैं। आलस छोड़ो और अपना काम स्वयं करने की आदत डालो। 

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