अनुच्छेद-वर्षा का महत्व-Anuchhed

अनुच्छेद – ‘ वर्षा का महत्व
 

रुपरेखा : छः  ऋतुएं   – वर्षा का आगमन  – वर्षा के लाभ  – वर्षा के अवगुण 

 

हमारे देश में  छः ऋतुएं होती हैं। गर्मी में झुलसते तापमान से जलती धरती और इन्सान को राहत देने वाली वर्षा का सब स्वागत करते हैं। वर्षा के आने से धरती पर जैसे प्रकृति की एक सुन्दर सी हरी भरी चादर चढ़ जाती है। झरने मोतियों सा पानी गिराते हैं और नदियां फिर पानी से लबालब भर जाती है। हवा में ठंडक मौसम को सुहावना बना देती है। पेड़ पौधे और फसलें भरपूर लहराती हैं। पूरे वर्ष भर के लिए पीने के पानी को बड़े से बांधों में इकठ्ठा किया जाता है। वर्षा के मौसम में गरमागरम पकोड़े खाने का स्वाद निराला ही होता है। 

एक तरफ वर्षा जहाँ खुशहाली लाती है दूसरी तरफ कुछ समस्याएं भी खड़ी हो जाती हैं। सड़को पर गड्ढे पड़ जाते हैं और वह पूरी  पानी में डूब जाती हैं। नदियां उफान पर पहुँच आस-पास के गांवो और  शहरों को जल समाधि में बदल देती हैं। बाढ़ के पानी से लोगों के घर गिर जाते है। और फिर शुरू होता है मछरों, मक्खियों, मेंडक और सांप निकलने का सिलसिला। इन सब के साथ मलेरिया इत्यादि बीमारियों से जूझने का समय आ जाता है। 

अगर हम प्रशासन के साथ मिल कर थोड़ी जिम्मेवारी से इन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। तभी यह वर्षा एक वरदान सिद्ध हो सकती है। 

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