अनुच्छेद लेखन-देश प्रेम

अनुच्छेद – ‘ देश प्रेम ‘
 
रुपरेखा : राष्ट्रभक्ति एक सर्वोच्च भावना  – देशभक्ती ही गौरव शाली प्रतिभा – देश की शोभा – मातृभूमि के प्रति आभार – देश प्रेम में त्याग 
मानव स्वभाव से ही अवलोकन करने वाला प्राणी है। व्यक्ति जिस देश में जन्म लेता है, जिसमे रहता है उसके और उसकी संस्कृति के प्रति अपनापन होना स्वाभाविक है। सच्चा देश भक्त अपने देश को सफलता के ऊँचे शिखर पर पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयत्न करता है। भारतवर्ष में देशभक्ति की गौरवशाली परम्परा रही है। हर युग में जब भी जरूरत पड़ी अनेक वीरों और वीरांगनाओं ने देश पर हँसते-हँसते अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। शिवाजी ,महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मी बाई ,तिलक, आज़ाद, सुभाष, भगत सिंह जैसे अनेक देशभक्तों ने देश की आन को बचाने के लिए धन-दौलत ,सुख ,वैभव आदि सब त्याग दिया। अपनी धरती माँ और अपनी जन्म भूमि स्वर्ग से भी महान होती है, जैसे उचित कहा गया है – जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गात अपि गरीयसी। देश प्रेम वही होता है जो अपने देश के प्रति ईमानदार हो, तन-मन-धन से देश की सेवा करे और विपदा के समय अपना सब कुछ न्योछावर करने में जरा भी न झिझके।

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