अनुच्छेद-राष्ट्रीय एकता-Anuchhed

 

अनुच्छेद – राष्ट्रीय एकता 


रूपरेखा : एकता की जरुरत – अनेक जातीयता एक कमजोरी – हर वर्ग का योगदान
आम आदमी में जागृति होना 
 
देश में प्रगति, शांति और सुरक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकता बहुत ही जरूरी है। हमारा देश विभिन्न धर्म और जाति के भेद भाव के चलते एकता के पाठ को भूल सा गया है। कहीं अमीरी-गरीबी की लक्ष्मण रेखा तो कही उत्तर-दक्षिण का भेद, कहीं मैं हिन्दू-वह मुस्लिम तो कहीं मैं ब्राह्मण-वह छोटी जाति का। इन्ही विविधताओं ने हमें एक दूसरे से दूर कर दिया है, जिस वजह से राष्ट्र कमजोर पड़ जाता है और प्रगति में रुकावट आती है। इन भिन्न-भिन्न त्रासदियों से ऊपर उठ कर और एकजुट हो कर राष्ट्र को उन्नति के पथ पर ले जाने में हाथ बटाना चाहिए। क्या हर वर्ग के लोग मिलजुल कर सलमान खान की पिक्चर और सचिन तेंदुलकर के शतक का इंतजार नहीं करते। देश की सीमाओं पर जब कोई खतरा मंडराता है तो सब धर्म जाति भूल कर एकजुट हो सेना का साथ नहीं देते। अगर यह सब करते हैं तो क्यों न एकता के बंधन में बंद कर हम अपने राष्ट्र को उन्नति और शांति के नए शिखर पर ले चलें। यह एकता तभी संभव होगी जब हम सब भेदों को भुला संगठित हो राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे। 

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