अनुच्छेद-मेरे जीवन का लक्ष्य

अनुच्छेद – ‘ मेरे जीवन का लक्ष्य

रुपरेखा : लक्ष्य क्या है  – लक्ष्य प्राप्ति – लक्ष्य पूरा करना 

मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसमें ईश्वर ने सोचने समझने की शक्ति प्रदान की है। उचित और अनुचित का चुनाव कर हम अपने भविष्य को सँवारने की कल्पना करते हैं। उसी कल्पना को साकार करने के लिए जीवन में एक लक्ष्य होना जरूरी है। हर इंसान का लक्ष्य अलग-अलग होता है। कोई इंजीनियर, डॉक्टर, अध्यापक तो कोई व्यवसाय करना चाहता है। 

लोगों की निस्वार्थ सेवा करने की मन की चाहत को मैंने अपना जीवन लक्ष्य बनाया। और उसी रास्ते पर चलते हुए बारहवीं की कक्षा में बहुत मेहनत कर अच्छे नम्बरों से पास हुआ। मेडिकल कॉलेज में प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण हो कर एक मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया। लगनशील होकर पढ़ाई की और सफलतापूर्वक डॉक्टर बन गया। हॉस्पिटल में लगन से काम कर अपने से बड़े डॉक्टरों से तरह-तरह के इलाजों को सीखा। 

हॉस्पिटल में काम करने के कुछ सालों बाद अपना दवाखाना खोला। मैंने मरीजों की दिन रात सेवा की। गरीब मरीजों से कम पैसा लेने लगा। हमेशा एक बात का ख्याल रखा कि कोई भी पैसे या किसी और वजह से इलाज़ से वंचित न रह जाए। निष्ठा से अपना काम किया तो ख्याति और आशीर्वाद भी खूब कमाया।  यही था मेरे जीवन का लक्ष्य। 

यह मेरे लिए एक यादगार यात्रा थी। 

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