अनुच्छेद-महिला सशक्तिकरण-Anuchhed

अनुच्छेद – ‘ महिला सशक्तिकरण ‘
 

रुपरेखा : तात्पर्य – क्यों जरूरी है – कैसे किया जाए   

 

एक प्रगतिशील समाज में महिलाओं के योगदान को महत्वपूर्ण दर्जा देकर और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने देना ही असल में महिला सशक्तिकरण को दर्शाता है। लेकिन आज भी महिलाओं को नीचे का दर्जा देकर पुरुषप्रधान (Male Dominant) सोच उनके रास्ते में रुकावटें पैदा करती रहती हैं। हर क्षेत्र में महिलाओं को कम आंक कर अनदेखा सा कर दिया जाता है। इन्ही कारणों से महिलाएं आज भी सर उठा कर जीने में संकोच करती हैं। जब भी महिलाओं ने इस सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की कोशिश की तो सरकार, समाज, धर्म, न्याय के ठेकेदारों ने उस आवाज जो कुचल दिया ताकि नारी हमेशा ही कमजोर बनी रहे। महिलाओं के विरुद्ध इस सांठ-गांठ को तोड़ना ही होगा। इस कपट-योजना को तोड़ने के लिए हमें महिलाओं को हर  क्षेत्र  के उच्च स्थानों पर बराबरी का भागीदार बनाना होगा। देश के न्यायालय, संसद, पंचायत और निजी संस्थानों में उनके लिए स्थान सुनिश्चित करने होंगे। नौकरी में सुअवसर देकर उन्हें आगे अपने साथ लेकर चलना होगा। महिलाओं पर अत्याचार के मामलों से जुड़ी हर जांच-समिति में महिलाओं की उपस्थिति अनिवार्य कर उचित न्याय की प्रणाली को बढ़ाना होगा। 

ऐसे ही कुछ और कदम उठा कर हम महिलाओं के सशक्तिकरण द्वारा देश निर्माण और संतुलित समाज के सपनों को साकार कर पाएंगे।  

Also Read:


Your comments encourage us

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.