अनुच्छेद – बाल मजदूरी-Anuchhed Lekhan

अनुच्छेद – ‘ बाल मजदूरी ‘
 

रुपरेखा : निर्धनता – साधनों की कमी – नियमों की जागरूकता 

गरीबी में पले और पढ़ाई से वंचित बच्चे अक्सर ढाबों और दुकानों पर काम करते देखे जाते हैं। जिस उम्र में उन्हें किताबों या खिलौनों से लगाव होना चाहिए उस समय वह काम के बोझ से दब कर अपना बचपन खो देते हैं। अमीर लोगों की तरह सुख साधनों और पैसों के अभाव में इन गरीब बच्चों के माता-पिता इन्हे स्कूल भेजने की जगह इन कामों में लगाने पर मजबूर हो जाते हैं। यह बाल-मजदूरी किसी भी राष्ट्र के लिए एक कलंक समान है। 

इस कलंक को जड़ से मिटाने के लिए सरकारी योजना के अंतर्गत हर बच्चे को मुफ्त और मौलिक शिक्षा और भरपूर पौष्टिक भोजन की व्यवस्ता होनी चाहिए। प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य और मुफ्त हो ताकि कोई भी बच्चा इससे वंचित न रह जाए। 

माता-पिता और बच्चों से बाल मजदूरी करवाने वाले लोगों के विरुद्ध सख्त नियम बना उनका पालन करना चाहिए। इन नियमों का अधिक से अधिक प्रचार कर हम इस बाल मजदूरी से छुटकारा पा सकते हैं और बच्चों को उनका बचपन लौटा सकते हैं। बच्चों के हाथ में झाड़ू-पोछा नहीं बल्कि किताब और खिलौने दें, वह राष्ट्र के भावी निर्माता हैं। 

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